त्योहारी सीजन से पहले सोना-चांदी में नरमी: जानिए 10 ग्राम गोल्ड और 1 किलो चांदी के ताजा भाव
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 15 अक्टूबर को दोनों कीमती धातुओं के भाव में एक बार फिर कमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत 500 रुपये गिरकर 10 ग्राम के लिए 1,45,564 रुपये पर आ गई है। वहीं, चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम 6,724 रुपये की बड़ी गिरावट आई है।
लगातार पांच दिनों से जारी इस गिरावट के चलते सोना और चांदी अपने हालिया ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में उन लोगों की नजर बाजार पर है, जो शादी-ब्याह, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं।
आज कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी?
IBJA के आंकड़ों के अनुसार, 14 अक्टूबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,46,064 रुपये था, जो 15 अक्टूबर को घटकर 1,45,564 रुपये रह गया। यानी एक दिन में 500 रुपये की गिरावट आई।
वहीं, चांदी का भाव बुधवार को 2.14 लाख रुपये प्रति किलो था, जो गुरुवार को घटकर करीब 2.07 लाख रुपये पर आ गया। इसमें 6,724 रुपये की कमी दर्ज की गई।
पिछले पांच दिनों में सोने की कीमत कुल 3,866 रुपये और चांदी की कीमत 14,011 रुपये तक गिर चुकी है। 9 अक्टूबर को सोना 1.49 लाख रुपये और चांदी 2.21 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी।
ऑल टाइम हाई से कितना नीचे आया सोना-चांदी?
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। दी गई जानकारी के मुताबिक, 29 जनवरी 2026 को चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और अब यह करीब 2.07 लाख रुपये पर है।
सोने की बात करें तो 31 दिसंबर 2025 को इसकी कीमत करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर लगभग 1.76 लाख रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। अब इसकी कीमत घटकर 1,45,564 रुपये रह गई है।
हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतें और गिरावट का अंतर अलग हो सकता है। खरीदारी से पहले ताजा भाव की पुष्टि करना जरूरी है।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं?
एक ही दिन सोने की कीमत जयपुर, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में अलग-अलग हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हैं।
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ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा खर्च: सोने को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने में आने वाला खर्च कीमत को प्रभावित कर सकता है।
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स्थानीय मांग और सप्लाई: किसी शहर में सोने की मांग ज्यादा होने या सप्लाई कम होने से स्थानीय भाव में अंतर आ सकता है।
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ज्वेलर्स का मार्जिन: अलग-अलग दुकानों के मेकिंग चार्ज, मार्जिन और अन्य शुल्क अलग होते हैं।
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टैक्स और स्थानीय बाजार की परिस्थितियां: लागू टैक्स, व्यापारिक लागत और स्थानीय प्रतिस्पर्धा के कारण भी अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।
ध्यान रखें कि IBJA का प्रकाशित भाव और ज्वेलरी शोरूम में मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। मेकिंग चार्ज और लागू GST के कारण बिल की रकम बढ़ सकती है।
सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप गिरती कीमतों के बीच सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल भाव देखकर फैसला न करें।
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BIS हॉलमार्क जांचें: सोने की शुद्धता और हॉलमार्किंग की जानकारी जरूर देखें।
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HUID नंबर सत्यापित करें: हॉलमार्क वाले आभूषण पर मौजूद छह अंकों के HUID को BIS Care ऐप के जरिए जांचा जा सकता है।
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वजन और कीमत मिलाएं: खरीदारी से पहले सोने का शुद्ध वजन, प्रति ग्राम भाव और मेकिंग चार्ज अलग-अलग पूछें।
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पक्का बिल लें: बिल में शुद्धता, वजन, कीमत और अन्य शुल्क की जानकारी होनी चाहिए।
सोना खरीदने से पहले 22 कैरेट और 24 कैरेट के भाव में अंतर भी समझ लें। आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने में किया जाता है, जबकि 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है।
असली चांदी की पहचान कैसे करें?
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना भी जरूरी है। कुछ सामान्य संकेत मदद कर सकते हैं, लेकिन घरेलू टेस्ट से असली चांदी की पक्की पुष्टि नहीं होती।
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हॉलमार्क जांचें: उपलब्ध BIS हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी सत्यापित करें।
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मैग्नेट टेस्ट: शुद्ध चांदी आमतौर पर चुंबक से नहीं चिपकती, लेकिन केवल इस टेस्ट से असली-नकली का फैसला नहीं किया जा सकता।
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रंग और सतह देखें: चांदी पर समय के साथ कालापन आ सकता है, लेकिन यह अकेले उसकी शुद्धता का प्रमाण नहीं है।
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विश्वसनीय विक्रेता से खरीदें: पक्का बिल और शुद्धता का प्रमाण जरूर लें।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद खरीदारी करने वालों को राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन कीमतें आगे भी गिरेंगी या फिर तेजी लौटेगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
अगर आप शादी या किसी दूसरे जरूरी काम के लिए सोना खरीद रहे हैं, तो बजट और जरूरत को प्राथमिकता दें। निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय अपने जोखिम और निवेश की अवधि पर विचार करना चाहिए।