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GIFT City Liquor Sale: गुजरात में शराबबंदी के बावजूद यहां धड़ल्ले से बिक रही शराब, 15 गुना बढ़ी बिक्री
 

 

गुजरात में लंबे समय से शराबबंदी लागू है, लेकिन राज्य की GIFT City में शराब की बिक्री को लेकर सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी में पिछले एक साल के दौरान शराब की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में यहां शराब की बिक्री 15 गुना से ज्यादा बढ़ गई।


दो साल में बिकी 60 हजार लीटर से ज्यादा शराब
सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच GIFT City में कुल 60,354 लीटर से अधिक भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की बिक्री हुई। इससे राज्य सरकार को करीब 87.39 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
आंकड़ों से पता चलता है कि शराब की बिक्री में सबसे बड़ा उछाल दूसरे साल में आया है।


एक साल में 3,716 से बढ़कर 56,638 लीटर हुई बिक्री
अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच GIFT City में करीब 3,716 लीटर शराब की बिक्री दर्ज की गई थी। इसके बाद अगस्त 2025 से जुलाई 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 56,638 लीटर पहुंच गया।
यानी एक साल के भीतर बिक्री में कई गुना वृद्धि हुई। दोनों वर्षों के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल बिक्री 60,354 लीटर से ज्यादा बैठती है।


GIFT City में क्यों मिली शराब की इजाजत?
GIFT City को अंतरराष्ट्रीय स्तर के वित्तीय और टेक्नोलॉजी हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां देश-विदेश की बड़ी कंपनियों के साथ निवेशक और प्रोफेशनल्स काम करते हैं। सरकार का तर्क रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कारोबारी माहौल को ध्यान में रखते हुए यहां कुछ निर्धारित स्थानों पर वाइन एंड डाइन की सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है।


इसी वजह से GIFT City के लिए शराबबंदी के नियमों में विशेष प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह सुविधा पूरे गुजरात में लागू नहीं है।
गुजरात में शराबबंदी, GIFT City को विशेष छूट
गुजरात में शराब का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और सेवन सामान्य तौर पर प्रतिबंधित है। लेकिन GIFT City को इस नियम से विशेष छूट दी गई है। सरकार ने दिसंबर 2023 में GIFT City के लिए शराबबंदी कानून में बदलाव करते हुए निर्धारित नियमों के तहत शराब की अनुमति दी थी।
यही कारण है कि गुजरात के बाकी हिस्सों में शराबबंदी जारी रहने के बावजूद GIFT City में अधिकृत स्थानों पर शराब की बिक्री की जा सकती है। अब नए सरकारी आंकड़ों में बिक्री में हुई तेज वृद्धि ने एक बार फिर इस विशेष व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है।