ट्रम्प की हार से लेकर धनतेरस के बूस्टर तक: सेंसेक्स में 1700 अंक की सुनामी, निफ्टी भी 450 अंक की छलांग पर!
धनतेरस से ठीक एक दिन पहले गुरुवार, 5 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में जोरदार उछाल आया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1700 अंक यानी 2.15% चढ़कर 79,000 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, बाजार में इस तेजी के चलते निवेशकों की संपत्ति में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी में भी शानदार खरीदारी देखने को मिली। यह करीब 450 अंक यानी 2% की बढ़त के साथ 24,440 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। खास बात यह है कि निफ्टी ने 4 सितंबर के बाद पहली बार 24 हजार का आंकड़ा पार किया है।शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के चेहरे खिल गए हैं। बाजार में खरीदारी का माहौल बनने के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे और डॉलर में कमजोरी की उम्मीद जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।
शेयर बाजार में तेजी की ये हैं 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिकी चुनाव के नतीजों से बाजार को मिला सहारा
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों को लेकर वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिली। चुनाव में ट्रंप की पार्टी को दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा। इससे ईरान के साथ चल रहे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को बल मिला है।निवेशकों को उम्मीद है कि अगर युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो वैश्विक व्यापार को राहत मिल सकती है। इससे कंपनियों के कारोबार और आर्थिक गतिविधियों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। अमेरिकी शेयर बाजार में भी चुनाव नतीजों के बाद अच्छी तेजी देखने को मिली, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर करीब 94 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम हो सकता है।
इसके अलावा पेट्रोलियम कंपनियों की लागत, महंगाई और देश के चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
3. बड़ी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बढ़ा भरोसा
सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। कई बड़ी कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे बाजार में खरीदारी बढ़ी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स में शामिल बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का सीधा असर इंडेक्स पर पड़ता है।
जब बाजार की प्रमुख कंपनियों में खरीदारी बढ़ती है तो सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद मिलती है। गुरुवार को भी ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी का माहौल रहा।
4. डॉलर कमजोर होने की उम्मीद से विदेशी निवेशकों का रुझान बढ़ा
डॉलर में कमजोरी की संभावना भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश करना आकर्षक हो सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से खरीदारी बढ़ने पर भारतीय शेयर बाजार में पूंजी का प्रवाह मजबूत होता है। इससे प्रमुख इंडेक्स में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है।
लगातार छठे कारोबारी दिन बाजार में तेजी
भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार छठे कारोबारी दिन भी जारी रहा। 28 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच सेंसेक्स में शानदार उछाल देखने को मिला। इस दौरान सेंसेक्स 73,246 के स्तर से बढ़कर 79,000 के करीब पहुंच गया।
इससे पहले 15 अक्टूबर को भी शेयर बाजार में बड़ी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,533 अंक चढ़कर बंद हुआ था।
वहीं, 8 अप्रैल को सेंसेक्स में 2,946 अंकों की जोरदार तेजी दर्ज की गई थी, जो इस साल की सबसे बड़ी बढ़त रही है।
एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार
भारतीय शेयर बाजार में जहां जोरदार तेजी देखने को मिली, वहीं एशियाई बाजारों में कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। कुछ प्रमुख इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
| एशियाई इंडेक्स | स्तर | बदलाव | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|
| कोस्पी (दक्षिण कोरिया) | 5,471 | -212 | -3.70% |
| निक्केई (जापान) | 61,914 | -275 | -0.44% |
| हैंगसेंग (हांगकांग) | 24,714 | +795 | +3.33% |
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
धनतेरस से पहले शेयर बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल के साथ बाजार का माहौल सकारात्मक हुआ है। हालांकि, शेयर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए।
आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझना जरूरी है।