रियल एस्टेट से इलेक्ट्रॉनिक्स तक बदलेगा खेल! नए टैक्स बिल 2026 में सरकार ने किए बड़े प्रावधान, जानें किसे होगा फायदा
देश को निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा के लिए एक ग्लोबल हब बनाने के मकसद से, केंद्र सरकार ने टैक्स में बदलाव करने वाला एक नया बिल पेश किया है - 'द टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026'। लोकसभा से पास हुआ यह बिल सिर्फ़ कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि भारत में विदेशी पूंजी लाने, 'मेक इन इंडिया' पहल को मज़बूत करने और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' को एक नए स्तर पर ले जाने का एक मास्टर प्लान है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस और जानकारी के अनुसार, यह बिल इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, डायमंड ट्रेडिंग, फंड मैनेजमेंट और बिज़नेस ट्रस्ट (REITs/InvITs) जैसे सेक्टर के साथ-साथ छोटे निवेशकों के लिए भी टैक्स नियमों को बहुत पारदर्शी और भविष्य के हिसाब से बेहतर बनाएगा।
**इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए फ़ायदे**
मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप और सर्वर की मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत को एक ग्लोबल हब बनाने के मकसद से दो बड़े कदम उठाए गए हैं। पहले, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स फ़ैक्टरियों के लिए कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में पार्ट्स या कंपोनेंट रखने वाली विदेशी कंपनियों पर 2% का प्रिजम्पटिव टैक्स (सेफ़ हार्बर) लागू था; इस सिस्टम को लेकर टैक्स फ़ाइलिंग और संभावित विवादों की चिंताएं थीं। नए बिल के तहत, इस 2% टैक्स को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है और 15 साल के लिए 100% टैक्स छूट दी जा रही है। इस कदम से भारत वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से आगे निकल सकेगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए मशीनरी और टूलिंग सप्लाई करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स छूट की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 15 साल (वित्तीय वर्ष 2040-41 तक) कर दी जाएगी। बिल में मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, सर्वर, वियरेबल्स और उनके स्पेयर पार्ट्स को इसके दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
**छोटे निवेशकों के लिए डिविडेंड पूरी तरह टैक्स-फ़्री होंगे**
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (बिज़नेस ट्रस्ट) में आम छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा की गई है। पहले, अगर कोई बिज़नेस ट्रस्ट ऑपरेटिंग कंपनी (SPV) नए टैक्स सिस्टम को चुनती थी, तो निवेशकों को मिलने वाले डिविडेंड टैक्स-फ़्री नहीं होते थे। संशोधित बिल के तहत, यूनिट होल्डर्स के लिए डिविडेंड पर टैक्स छूट फिर से लागू की जाएगी। आय के नुकसान की भरपाई के लिए, कंपनी (SPV) स्तर पर एक मामूली अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, ताकि छोटे निवेशकों पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े। **डेटा सेंटर और 'AI डेटा सिटीज़' का विकास**
भारत में बड़े पैमाने पर 'AI डेटा सिटीज़' के विकास को आसान बनाने और ग्लोबल क्लाउड कंपनियों को आकर्षित करने के लिए लालफीताशाही (अनावश्यक सरकारी नियम-कायदे) को हटा दिया गया है। विदेशी क्लाउड कंपनियों और भारतीय डेटा सेंटरों को अब IT मंत्रालय से अलग-अलग 'नोटिफिकेशन' या मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होगी। इसके अलावा, भारतीय कंपनियाँ लीज़ पर ली गई ज़मीन या इमारतों में वर्ल्ड-क्लास डेटा सेंटर चला पाएँगी, जिससे उन्हें शुरुआत में बड़ी पूँजी निवेश करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
**हीरा व्यापार के लिए ग्लोबल हब**
मुंबई और सूरत के स्पेशल नोटिफाइड ज़ोन (SNZ) में, कच्चे हीरों की प्रदर्शनी के साथ-साथ उनके व्यापार (खरीद-बिक्री) पर भी 15 साल तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह टैक्स छूट विदेशी माइनिंग कंपनियों के साथ-साथ उनके ब्रोकरों, साइटहोल्डर्स, एग्रीगेटर्स और नीलामी घरों पर भी लागू होगी, ताकि ग्लोबल हीरा व्यापार को भारत में लाया जा सके।
**बिज़नेस करना आसान बनाना**
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फंड्स को मैनेज करने वाले कुशल भारतीय फंड मैनेजरों को भारत लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। भारत में विदेशी फंड्स पर अनावश्यक टैक्स लगने के डर को दूर करने के लिए, पात्रता शर्तों की संख्या 13 से घटाकर सिर्फ़ 5 कर दी जाएगी। बार-बार होने वाले कागज़ी काम को खत्म करने से, विदेशी फंड मैनेजर आसानी से GIFT सिटी (IFSC) या भारत के किसी भी शहर से अपना काम कर पाएँगे।