बालकनी से लेकर डिजिटल सोलर तक, किराएदार ऐसे उठा सकते हैं ग्रीन एनर्जी का फायदा
बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के कारण देश में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि सोलर पैनल लगाने की सुविधा सिर्फ उन्हीं लोगों के पास है, जिनके पास अपना मकान और निजी छत है। लेकिन अब किराए के मकान में रहने वाले लोगों के लिए भी सौर ऊर्जा से जुड़ने के कई विकल्प मौजूद हैं।
कुछ राज्यों के नियमों, मकान मालिक की अनुमति और नई तकनीकों की मदद से किराएदार भी बिजली खर्च कम करने के लिए सोलर एनर्जी का लाभ ले सकते हैं। आइए जानते हैं किराए के घर में रहने वालों के लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
छत पर सोलर लगाने के लिए क्यों जरूरी है मालिक की अनुमति?
रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने में सबसे बड़ी भूमिका छत के अधिकार और बिजली कनेक्शन की होती है। सामान्य नेट-मीटरिंग व्यवस्था के तहत अक्सर उसी व्यक्ति को सोलर सिस्टम लगाने की अनुमति मिलती है, जिसके पास संपत्ति या छत का वैध अधिकार होता है।
किराएदार भी कुछ परिस्थितियों में इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए मकान मालिक की स्पष्ट सहमति जरूरी हो सकती है। खासतौर पर लंबे समय के रेंट या लीज एग्रीमेंट वाले मामलों में आवश्यक दस्तावेजों के साथ सोलर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
दिल्ली में किराएदारों के लिए क्या है व्यवस्था?
दिल्ली में नेट-मीटरिंग से जुड़ी प्रक्रिया में निवासियों के लिए अलग प्रावधान मौजूद हैं। किराए पर रहने वाले व्यक्ति को आवेदन के दौरान मकान मालिक की सहमति से जुड़े दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
इसके अलावा किराएदारी साबित करने के लिए वैध रेंट एग्रीमेंट या हाल की रेंट रसीद जैसे दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में नियम और प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले स्थानीय बिजली वितरण कंपनी और राज्य की सोलर नीति की जानकारी लेना जरूरी है।
बालकनी सोलर किट बन सकती है आसान विकल्प
जिन किराएदारों को छत इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलती, उनके लिए बालकनी सोलर सिस्टम एक विकल्प हो सकता है। यह तकनीक छोटे और पोर्टेबल सोलर सेटअप के रूप में विकसित की जा रही है।
ऐसे सिस्टम को बालकनी, खिड़की या उपयुक्त खुले स्थान पर लगाया जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि कई मॉडल में घर की संरचना में स्थायी बदलाव करने की जरूरत कम होती है।
किराएदार मकान बदलने पर सिस्टम को खोलकर अपने साथ दूसरी जगह ले जाने की सुविधा भी प्राप्त कर सकते हैं। यही वजह है कि पोर्टेबल सोलर सिस्टम किराए के घरों में रहने वालों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है।
बिना पैनल लगाए भी मिल सकता है सोलर एनर्जी का लाभ
आज के समय में डिजिटल और कम्युनिटी सोलर मॉडल भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इस व्यवस्था में उपभोक्ता को अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कुछ प्लेटफॉर्म के जरिए लोग किसी बड़े सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता में भागीदारी या सदस्यता ले सकते हैं। उस सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली के आधार पर उपभोक्ता को निर्धारित नियमों के तहत बिजली बिल में क्रेडिट या अन्य लाभ मिल सकता है।
यह विकल्प उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो किराए के घर में रहते हैं और सोलर पैनल लगाने, रखरखाव या मकान बदलने की परेशानी से बचना चाहते हैं।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किराएदारों को सोलर सिस्टम से जुड़ने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर जांच लेनी चाहिए—
• मकान मालिक की लिखित अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
• बिजली कनेक्शन किसके नाम पर है।
• संबंधित राज्य में नेट-मीटरिंग के क्या नियम हैं।
• सोलर सिस्टम लगाने के लिए छत या बालकनी उपयुक्त है या नहीं।
• पोर्टेबल सोलर सिस्टम को स्थानीय नियमों के तहत अनुमति है या नहीं।
• डिजिटल या कम्युनिटी सोलर मॉडल में बिजली बिल पर लाभ किस तरह मिलेगा।
किराएदारों के लिए भी खुल रहे हैं सोलर एनर्जी के रास्ते
पहले जहां सोलर पैनल को केवल अपने मकान वाले लोगों की सुविधा माना जाता था, वहीं अब तकनीक और नए ऊर्जा मॉडल इस सोच को बदल रहे हैं। मकान मालिक की सहमति से रूफटॉप सोलर, पोर्टेबल बालकनी किट और डिजिटल सोलर जैसे विकल्प किराएदारों के लिए भी सौर ऊर्जा तक पहुंच आसान बना सकते हैं।
हालांकि, किसी भी सिस्टम को अपनाने से पहले स्थानीय नियमों और बिजली कंपनी की शर्तों की जांच करना जरूरी है। सही विकल्प चुनकर किराए के मकान में रहने वाले लोग भी भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा और बिजली खर्च में बचत का फायदा उठा सकते हैं।