Videocon के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित: SBI का ₹12,668 करोड़ बकाया, NCLT ने नियुक्त किया बैंक्रप्सी ट्रस्टी
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को बड़ा झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने उन्हें दिवालिया (Bankrupt) घोषित कर दिया है। यह आदेश भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। बैंक का दावा है कि 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और पेनल्टी सहित धूत पर कुल बकाया राशि बढ़कर 12,668 करोड़ रुपये हो गई थी।
NCLT की बेंच ने 5 नवंबर 2026 को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत यह आदेश पारित किया। यह कार्रवाई धूत की व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया और उनके प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान के असफल होने के बाद की गई है। अब उनकी संपत्तियों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी नियुक्त बैंक्रप्सी ट्रस्टी संभालेंगे।
SBI की याचिका पर NCLT ने सुनाया फैसला
मामले के अनुसार, SBI ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिए गए कर्ज के लिए वेणुगोपाल धूत को व्यक्तिगत गारंटर बनाया था। कंपनी की ओर से कर्ज का भुगतान नहीं किए जाने के बाद बैंक ने व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर धूत के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
धूत ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को दिए गए कई तरह के कर्ज के बदले अपनी व्यक्तिगत गारंटी दी थी। इनमें रुपया टर्म लोन, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़ी क्रेडिट सुविधाएं और वर्किंग कैपिटल लोन शामिल थे। बैंक ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को लागू करते हुए धूत से बकाया राशि की मांग की थी।
बाद में भुगतान नहीं होने पर SBI ने NCLT का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने दस्तावेजों और बैंक की याचिका की जांच के बाद माना कि मामला IBC की जरूरी शर्तों को पूरा करता है।
क्या है वीडियोकॉन का पूरा इनसॉल्वेंसी मामला?
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद जून 2018 में कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू की गई थी। बाद में वीडियोकॉन ग्रुप की अन्य कंपनियों की इनसॉल्वेंसी कार्यवाही को भी इसके साथ जोड़ दिया गया।
इस मामले में जून 2021 में NCLT ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की ओर से पेश किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। हालांकि, कंपनी के कर्ज से जुड़ी व्यक्तिगत गारंटी का मामला अलग से आगे बढ़ता रहा। इसी प्रक्रिया के तहत अब वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्रवाई अपने निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
₹600 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव क्यों नहीं हुआ मंजूर?
वेणुगोपाल धूत के खिलाफ व्यक्तिगत इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी। इस दौरान उन्होंने कर्जदाताओं के सामने एक रीपेमेंट प्लान पेश किया था। इसके तहत उन्होंने सिलीगुड़ी में प्रस्तावित डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के माध्यम से 36 महीनों में 600 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, लेनदारों ने इस योजना को स्वीकार नहीं किया। NCLT के सामने रखे गए तथ्यों के मुताबिक, इस प्रस्ताव की सफलता भविष्य में प्रोजेक्ट के विकास, जरूरी सरकारी मंजूरियों और उससे होने वाले कैश फ्लो पर निर्भर थी। इसमें शुरुआत में कोई भुगतान करने का प्रावधान भी नहीं था।
इसके अलावा, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने बताया कि रीपेमेंट प्लान IBC के नियमों के तहत उनसे उचित परामर्श लेकर तैयार नहीं किया गया था। इन वजहों से कर्जदाताओं को प्रस्ताव भरोसेमंद नहीं लगा।
इसके बाद 17 जुलाई 2026 को NCLT ने रीपेमेंट प्लान को खारिज कर दिया और व्यक्तिगत इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया समाप्त कर दी। ट्रिब्यूनल ने कर्जदाताओं और देनदार को कानून के अनुसार आगे बैंक्रप्सी प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता दिया।
कुल बकाया रकम बढ़कर ₹12,668 करोड़ हुई
रीपेमेंट प्लान खारिज होने के बाद SBI ने वेणुगोपाल धूत के खिलाफ बैंक्रप्सी याचिका दायर की। बैंक ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 30 सितंबर 2026 तक धूत पर ब्याज और पेनल्टी सहित कुल डिफॉल्ट राशि 12,668 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
NCLT ने बैंक की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और दावों की जांच की। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका को स्वीकार करते हुए 5 नवंबर को धूत को दिवालिया घोषित करने का आदेश जारी कर दिया।
अब धूत की संपत्तियों का क्या होगा?
NCLT ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आशीष नारायण को बैंक्रप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। अब वेणुगोपाल धूत की संपत्तियों और वित्तीय मामलों से जुड़ी प्रक्रिया ट्रस्टी की निगरानी में होगी।
आदेश के तहत आगे की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
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ट्रस्टी की नियुक्ति: NCLT ने आशीष नारायण को बैंक्रप्सी ट्रस्टी बनाया है।
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संपत्तियों पर नियंत्रण: धूत की संपत्ति IBC के प्रावधानों के अनुसार ट्रस्टी के नियंत्रण और प्रबंधन में आएगी।
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वित्तीय जानकारी: धूत को सात दिनों के भीतर अपनी वित्तीय जानकारी और जरूरी दस्तावेज ट्रस्टी को सौंपने होंगे।
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कर्जदाताओं को सूचना: ट्रस्टी को सभी संबंधित कर्जदाताओं को प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।
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सार्वजनिक नोटिस: बकाया रकम के दावे आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी।
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90 दिनों में रिपोर्ट: ट्रस्टी को 90 दिनों के भीतर NCLT और कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के सामने शुरुआती रिपोर्ट पेश करनी होगी।
यह प्रक्रिया IBC के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार धूत के डिस्चार्ज होने तक जारी रहेगी।
क्या होती है पर्सनल गारंटी और बैंक्रप्सी?
पर्सनल गारंटी क्या है?
जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी या दूसरे व्यक्ति के लिए बैंक से लिए गए कर्ज की व्यक्तिगत गारंटी देता है, तो उसे पर्सनल गारंटी कहा जाता है। अगर कर्ज लेने वाली कंपनी भुगतान नहीं कर पाती है, तो बैंक गारंटर से भी बकाया वसूलने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है। वेणुगोपाल धूत के मामले में भी SBI ने इसी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर कार्रवाई की है।
बैंक्रप्सी क्या होती है?
जब कोई व्यक्ति अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाता है और कानून के तहत उसके खिलाफ दिवालियापन की प्रक्रिया पूरी होती है, तो उसे बैंकरप्ट घोषित किया जा सकता है। इसके बाद IBC के नियमों के अनुसार उसकी संपत्तियों और वित्तीय मामलों का प्रबंधन नियुक्त ट्रस्टी करता है। संपत्तियों से प्राप्त रकम को कानूनी प्रक्रिया के तहत कर्जदाताओं के दावों के निपटारे में इस्तेमाल किया जाता है।
वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर के लिए बड़ा कानूनी झटका
वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किए जाने का फैसला वीडियोकॉन समूह के पुराने कर्ज विवाद में एक अहम घटनाक्रम है। कंपनी के खिलाफ 2018 में शुरू हुई इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया के बाद अब व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर पूर्व प्रमोटर के खिलाफ भी कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है।12,668 करोड़ रुपये के बकाये और रीपेमेंट प्लान के असफल होने के बाद अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया बैंक्रप्सी ट्रस्टी की निगरानी में होगी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि संपत्तियों के मूल्यांकन और बिक्री के जरिए कर्जदाताओं के दावों का निपटारा किस तरह किया जाता है।