Flight Fare Hike: हवाई सफर होने वाला है महंगा? 30 दिन में दूसरी बार बढ़ा ATF का दाम, जानें कितना हुआ जेट फ्यूल
सितंबर की शुरुआत हवाई यात्रियों के लिए झटका लेकर आई है। 1 सितंबर 2026 से घरेलू एयरलाइंस के लिए Aviation Turbine Fuel (ATF) की कीमत में 6.28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही जेट फ्यूल का भाव 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह लगातार दूसरा महीना है, जब ATF की कीमत में इजाफा किया गया है।
30 दिन में 11.28 रुपये महंगा हुआ जेट फ्यूल
1 अगस्त 2026 को भी ATF की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। तब जेट फ्यूल का भाव 110 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हुआ था।
अब सितंबर में फिर 6.28 रुपये की बढ़ोतरी होने के बाद महज दो महीनों में ATF करीब 11.28 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। यानी एयरलाइंस की ईंधन लागत पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
जुलाई में घटे थे दाम
लगातार दो महीने की बढ़ोतरी से पहले जुलाई में एयरलाइंस को राहत मिली थी। 1 जुलाई 2026 को ATF की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी और इसका भाव 110 रुपये प्रति लीटर हो गया था।
इसके बाद अगस्त और सितंबर में लगातार दो बार कीमत बढ़ने से जेट फ्यूल की लागत फिर तेजी से बढ़ी है।
ATF महंगा होने से एयरलाइंस पर बढ़ेगा दबाव
विमानन कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़े खर्चों में शामिल है। घरेलू एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में ATF की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 फीसदी तक बताई जाती है। ऐसे में जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ सकता है।
कंपनियों के सामने अब बढ़ी हुई लागत को खुद वहन करने या उसका कुछ हिस्सा यात्रियों से वसूलने का विकल्प होगा।
क्या महंगे होंगे फ्लाइट टिकट?
ATF की कीमत बढ़ने से हवाई किराए पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टिकट की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। एयरलाइंस किराया तय करते समय ईंधन की लागत के साथ यात्रियों की मांग, रूट पर प्रतिस्पर्धा और उपलब्ध सीटों जैसे कई दूसरे कारकों को भी ध्यान में रखती हैं।
हालांकि, अगर ATF की कीमत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो एयरलाइंस के लिए बढ़ी लागत को संभालना मुश्किल हो सकता है और इसका असर टिकट की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर
ATF की ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से एयरलाइंस के ईंधन खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। सितंबर की शुरुआत में Brent क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि WTI 86 डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा था।
यात्रियों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
फिलहाल ATF की कीमत बढ़ने का असर टिकटों पर कितना पड़ेगा, यह एयरलाइंस के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा। लेकिन एक बात साफ है कि दो लगातार महीनों में जेट फ्यूल महंगा होने से विमानन कंपनियों की लागत बढ़ गई है। अगर यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है, तो हवाई सफर की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।