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किसानों की सिंचाई का खर्च होगा कम! PM-KUSUM योजना से सोलर पंप पर मिल सकती है भारी सब्सिडी
 

 


खेती में फसल की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई बेहद जरूरी है, लेकिन किसानों के लिए यही काम कई बार सबसे महंगा साबित होता है। डीजल के बढ़ते दाम, बिजली की अनियमित सप्लाई और भारी-भरकम बिल किसानों की लागत बढ़ा देते हैं। कई बार ट्रांसफॉर्मर खराब होने या बिजली कटौती के कारण फसल को समय पर पानी नहीं मिल पाता, जिससे किसानों की मेहनत और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं।

ऐसे में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी PM-KUSUM योजना किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती है। इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सरकारी सहायता दी जाती है। इससे सिंचाई के लिए डीजल और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।

सोलर पंप पर कैसे मिलती है सब्सिडी?

PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंप लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से वित्तीय सहायता का प्रावधान है। सामान्य व्यवस्था में केंद्र सरकार 30 प्रतिशत तक केंद्रीय वित्तीय सहायता देती है, जबकि राज्य सरकार की ओर से भी सब्सिडी दी जा सकती है। शेष राशि में किसान का हिस्सा और बैंक लोन शामिल हो सकता है।

हालांकि, सब्सिडी का वास्तविक प्रतिशत, किसान का अंश और लोन की व्यवस्था राज्य की योजना और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने राज्य के संबंधित विभाग से मौजूदा शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।

सोलर पंप लगने के बाद किसान दिन के समय धूप से मिलने वाली सौर ऊर्जा का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर सकते हैं। इससे डीजल पंप के ईंधन खर्च और बिजली पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है।

खाली जमीन से भी कमाई का मौका

PM-KUSUM योजना का फायदा केवल सोलर पंप तक सीमित नहीं है। योजना के Component-A के तहत किसानों, किसान समूहों और अन्य पात्र संस्थाओं को विकेंद्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने का अवसर दिया जाता है।

खाली या बंजर जमीन का इस्तेमाल सौर ऊर्जा परियोजना के लिए किया जा सकता है। परियोजना से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा सकता है और अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम को बेचने से आय का रास्ता भी बन सकता है।

इस तरह किसान खेती के साथ-साथ अपनी जमीन से सौर ऊर्जा के जरिए अतिरिक्त कमाई का विकल्प भी तलाश सकते हैं।

आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

PM-KUSUM के लिए आवेदन की प्रक्रिया और पात्रता राज्य के अनुसार अलग हो सकती है। किसानों को केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल या अपने राज्य के संबंधित नोडल विभाग के माध्यम से ही आवेदन करना चाहिए।

आवेदन के दौरान आमतौर पर आधार, जमीन से जुड़े दस्तावेज, बैंक खाते की जानकारी और अन्य जरूरी कागजात मांगे जा सकते हैं। दस्तावेजों की जांच और पात्रता की पुष्टि के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होती है।

सब्सिडी मिलने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति या एजेंट को पैसे देने से बचें। आवेदन से पहले यह जरूर जांच लें कि आपके राज्य में योजना के तहत आवेदन फिलहाल खुले हैं या नहीं और किस क्षमता के सोलर पंप पर कितनी सहायता उपलब्ध है।

किसानों के लिए क्यों खास है योजना?

सोलर पंप से किसानों को सिंचाई के लिए डीजल और बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां बिजली की आपूर्ति अनियमित रहती है, सौर ऊर्जा आधारित पंप एक वैकल्पिक व्यवस्था बन सकते हैं।

इसके अलावा, योजना का सौर ऊर्जा वाला हिस्सा किसानों को अपनी जमीन का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और संभावित अतिरिक्त आय के लिए करने का अवसर देता है। यानी कम सिंचाई लागत के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में कमाई का विकल्प भी तैयार हो सकता है।