EPF Calculation: हर महीने ₹10,750 जमा कर तैयार हो सकता है ₹1 करोड़ का फंड, VPF से बढ़ेगी रकम
रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करने में Employee Provident Fund यानी EPF अहम भूमिका निभा सकता है। नौकरी के दौरान नियमित योगदान और लंबे समय तक मिलने वाला कंपाउंडिंग का फायदा रिटायरमेंट के समय एक अच्छी रकम तैयार करने में मदद कर सकता है।
अगर किसी कर्मचारी के EPF में हर महीने करीब ₹10,750 का योगदान होता है और वह करीब 25 साल तक लगातार निवेश करता है, तो 8.25 फीसदी सालाना ब्याज दर के अनुमान पर फंड करीब ₹1 करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि, वास्तविक रकम ब्याज दर और योगदान में होने वाले बदलाव के आधार पर अलग हो सकती है।
EPF में कर्मचारी और कंपनी दोनों करते हैं योगदान
EPFO के नियमों के मुताबिक कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी EPF में योगदान करता है। नियोक्ता की ओर से भी 12 फीसदी योगदान किया जाता है। हालांकि, कंपनी के योगदान का पूरा हिस्सा EPF खाते में नहीं जाता।
नियोक्ता के योगदान में से 8.33 फीसदी हिस्सा Employees' Pension Scheme यानी EPS में और 3.67 फीसदी EPF खाते में जाता है। इस वजह से कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड को समझते समय योगदान के इन हिस्सों को ध्यान में रखना जरूरी है।
25 साल की नौकरी में कैसे बन सकता है ₹1 करोड़?
एक उदाहरण के तौर पर मान लें कि कर्मचारी के खाते में हर महीने कुल ₹10,750 का EPF योगदान हो रहा है और वह लगातार 25 साल तक नौकरी करता है। अगर इस दौरान औसत सालाना ब्याज दर 8.25 फीसदी मानी जाए और मासिक योगदान में कोई बदलाव न हो, तो कंपाउंडिंग के कारण रिटायरमेंट तक फंड करीब ₹1 करोड़ के आसपास पहुंच सकता है।
यानी लंबे समय तक छोटी-छोटी रकम का नियमित निवेश भी समय के साथ बड़ा फंड तैयार कर सकता है।
करियर ब्रेक लिया तो कितना असर पड़ेगा?
EPF में लंबे समय तक योगदान का फायदा कंपाउंडिंग के जरिए मिलता है। ऐसे में नौकरी के बीच लंबा ब्रेक लेने पर रिटायरमेंट फंड प्रभावित हो सकता है।
मसलन, अगर कर्मचारी 25 साल के बजाय केवल 22 साल तक ही योगदान करता है और बाकी 3 साल योगदान नहीं होता, तो इसी अनुमान के आधार पर उसका फंड करीब ₹76.6 लाख रह सकता है।
इस तरह तीन साल के योगदान रुकने से अनुमानित फंड में करीब ₹24.9 लाख का अंतर आ सकता है। यहां यह समझना जरूरी है कि करियर ब्रेक से पहले से जमा EPF राशि खत्म नहीं होती, लेकिन उस अवधि में नया योगदान और उस योगदान पर मिलने वाली भविष्य की कंपाउंडिंग नहीं हो पाती।
VPF से और बड़ा बनाया जा सकता है रिटायरमेंट फंड
जो कर्मचारी EPF के साथ अतिरिक्त बचत करना चाहते हैं, वे Voluntary Provident Fund यानी VPF का विकल्प भी देख सकते हैं। VPF के जरिए कर्मचारी अपनी इच्छा के अनुसार अतिरिक्त योगदान कर सकता है।
अगर कर्मचारी हर महीने EPF के अतिरिक्त ₹6,000 VPF में भी जमा करता है, तो कुल मासिक योगदान करीब ₹16,750 हो जाएगा। 25 साल तक इसी तरह योगदान करने और 8.25 फीसदी सालाना ब्याज का अनुमान लगाने पर कुल फंड करीब ₹1.58 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कंपाउंडिंग का फायदा समझना जरूरी
EPF में लंबी अवधि तक लगातार निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग से मिलता है। समय बढ़ने के साथ जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी आगे ब्याज कमाने लगता है। यही वजह है कि शुरुआत में छोटी लगने वाली रकम लंबे समय में बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार कर सकती है।
इसके उलट लंबे करियर ब्रेक या नियमित योगदान में रुकावट का असर भी कई वर्षों बाद बड़ा दिखाई दे सकता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग में इन बातों का रखें ध्यान
EPF और VPF के जरिए रिटायरमेंट फंड तैयार करते समय कर्मचारी को अपनी नौकरी की अवधि, मासिक योगदान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। ब्याज दरें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए ऊपर दिए गए आंकड़े अनुमानित उदाहरण हैं, गारंटीड मैच्योरिटी राशि नहीं।
नियमित योगदान बनाए रखना और उपलब्ध विकल्पों के अनुसार अतिरिक्त निवेश करना रिटायरमेंट के लिए बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है। निवेश से जुड़ा अंतिम फैसला लेने से पहले मौजूदा EPFO नियमों और योग्य वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।