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Edible Oil Price: खाने के तेल पर घटा आयात शुल्क, कंपनियों को MRP कम करने का निर्देश
 

 

त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने खाने के तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. सरकार की ओर से कई तरह के एडिबल ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में कटौती किए जाने के बाद अब केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने तेल कंपनियों और इंडस्ट्री संगठनों को इसका लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है. कंपनियों से कहा गया है कि वे लागत में आई कमी के अनुरूप MRP में भी कमी करें.

कई तेलों पर घटाई गई कस्टम ड्यूटी
सरकार ने क्रूड और रिफाइंड एडिबल ऑयल की अलग-अलग श्रेणियों पर आयात शुल्क में बदलाव किया है. इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना और उपभोक्ताओं को महंगे खाने के तेल से राहत देना है.
•    क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर BCD 10% से घटाकर शून्य किया गया.
•    क्रूड सोयाबीन ऑयल पर ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई.
•    क्रूड पाम ऑयल पर ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई.
•    रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल पर ड्यूटी में भी कटौती की गई.
•    रिफाइंड पाम ऑयल की इंपोर्ट ड्यूटी को भी कम किया गया.
कंपनियों को ग्राहकों तक पहुंचाना होगा फायदा
खाद्य मंत्रालय ने एडिबल ऑयल से जुड़े संगठनों और कंपनियों को सलाह जारी करते हुए कहा है कि आयात शुल्क में कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए. मंत्रालय ने कंपनियों से बिना देरी के घटे हुए लागत लाभ के आधार पर कीमतों और MRP की समीक्षा करने को कहा है.
सरकार का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ घरेलू खाद्य तेल की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है. जरूरत पड़ने पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं.
त्योहारों से पहले क्यों लिया गया फैसला?
देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इस दौरान खाने के तेल की मांग बढ़ जाती है. ऐसे समय में ऊंची कीमतों का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है. इसी को देखते हुए सरकार ने आयात शुल्क में कटौती का फैसला लिया है, ताकि घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके.

भारत का खाद्य तेल आयात भी बढ़ा
एडिबल ऑयल इंडस्ट्री बॉडी SEA के अनुमान के मुताबिक, ऊंचे आयात वॉल्यूम और रुपये की कमजोरी के कारण भारत का खाद्य तेल आयात बिल मौजूदा मार्केटिंग वर्ष में करीब 9% बढ़कर 1.75 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच सकता है.
नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच वनस्पति तेलों का आयात करीब 4% बढ़कर 13.88 मिलियन टन हो गया. इससे पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 13.37 मिलियन टन था.
भारत अपनी पाम ऑयल की जरूरत का बड़ा हिस्सा मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात करता है, जबकि सोयाबीन ऑयल के लिए अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे देशों पर निर्भरता रहती है.