Diwali Bonus: दिवाली पर हर कर्मचारी को बोनस मिलना जरूरी नहीं, जानें किसे मिलेगा कानूनी हक और कंपनी पर कब होगी कार्रवाई
दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही कर्मचारियों को अपनी कंपनियों से बोनस और दूसरे तोहफे मिलने का इंतजार रहता है। कई कंपनियां त्योहार के मौके पर कर्मचारियों को मिठाई, गिफ्ट और अतिरिक्त बोनस देती हैं, ताकि वे त्योहार की खरीदारी और अन्य खर्च आसानी से पूरे कर सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ परिस्थितियों में कर्मचारियों को बोनस देना कंपनी के लिए कानूनी रूप से जरूरी होता है?
अगर कोई कंपनी कानून के तहत पात्र कर्मचारी को अनिवार्य बोनस नहीं देती है, तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। हालांकि, दिवाली पर मिलने वाला अतिरिक्त बोनस और कानून के तहत मिलने वाला सालाना बोनस अलग-अलग हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों को बोनस से जुड़े क्या अधिकार मिलते हैं।
बोनस को लेकर क्या कहता है कानून?
भारत में कर्मचारियों को बोनस देने से जुड़े प्रावधान पहले पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 के तहत लागू थे। इसके अंतर्गत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र कर्मचारियों को बोनस देने का प्रावधान था।
बोनस से जुड़े प्रावधान अब कोड ऑन वेजेज, 2019 के अंतर्गत आते हैं। नए श्रम कानूनों के लागू होने के बाद कर्मचारियों की पात्रता और बोनस भुगतान से जुड़े मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों और नियमों को देखना जरूरी है।
इसलिए किसी कर्मचारी को बोनस मिलेगा या नहीं, यह केवल कंपनी की इच्छा पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए लागू कानून, कर्मचारी की पात्रता और अन्य निर्धारित शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं।
किन कर्मचारियों को मिल सकता है बोनस?
बोनस का लाभ हर कर्मचारी को अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए वेतन सीमा, प्रतिष्ठान पर कानून की लागू होने की शर्तें, काम करने की अवधि और अन्य पात्रता संबंधी नियमों को ध्यान में रखा जाता है।
पहले के पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट के तहत पात्र कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बोनस 8.33 प्रतिशत और अधिकतम बोनस 20 प्रतिशत तक निर्धारित था। हालांकि, किसी कर्मचारी को वास्तविक रूप से कितना बोनस मिलेगा, यह लागू प्रावधानों और संबंधित परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
नए कानूनी ढांचे के तहत पात्रता तय करते समय लागू वेतन सीमा और संबंधित नियमों की जांच करना जरूरी है। इसलिए कर्मचारियों को अपनी कंपनी की HR नीति के साथ-साथ लागू श्रम कानून की शर्तों की जानकारी भी लेनी चाहिए।
क्या दिवाली पर बोनस देना हर कंपनी के लिए जरूरी है?
इस सवाल का जवाब है—नहीं, दिवाली पर अलग से अतिरिक्त बोनस देना हर कंपनी के लिए अनिवार्य नहीं है।
कानून के तहत पात्र कर्मचारी को मिलने वाला सालाना बोनस और कंपनी की ओर से त्योहार पर दिया जाने वाला अतिरिक्त बोनस अलग-अलग हो सकते हैं। दिवाली पर मिलने वाला अतिरिक्त बोनस कंपनी की नीति, रोजगार समझौते, सेवा शर्तों या किसी लागू नियम पर निर्भर कर सकता है।
इसलिए कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि सालाना कानूनी बोनस का अधिकार और दिवाली पर मिलने वाला अतिरिक्त भुगतान एक ही चीज नहीं हैं।
बोनस नहीं देने पर कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
अगर कोई कंपनी कानून के तहत पात्र कर्मचारी को अनिवार्य बोनस नहीं देती है, तो कर्मचारी संबंधित श्रम विभाग या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत कर सकता है। शिकायत की जांच के बाद लागू कानून के अनुसार कंपनी या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि बोनस नहीं देने पर कंपनी के मालिक या बॉस को सीधे जेल हो जाएगी। कार्रवाई का स्वरूप मामले के तथ्यों, उल्लंघन की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
बोनस नहीं मिला तो कर्मचारी क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आप कानूनी रूप से बोनस पाने के पात्र हैं, लेकिन कंपनी ने भुगतान नहीं किया है, तो ये कदम उठा सकते हैं:
• HR से संपर्क करें: सबसे पहले कंपनी के HR विभाग या मैनेजमेंट से बोनस नहीं मिलने का कारण पूछें।
• लिखित रिकॉर्ड रखें: वेतन पर्ची, नियुक्ति पत्र, कंपनी की बोनस नीति और संबंधित ईमेल या संदेश सुरक्षित रखें।
• श्रम विभाग में शिकायत करें: कंपनी से समाधान नहीं मिलने पर संबंधित श्रम अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करें।
• पात्रता की पुष्टि करें: शिकायत करने से पहले यह जांच लें कि आपकी नौकरी, वेतन और कंपनी पर संबंधित कानून की शर्तें लागू होती हैं या नहीं।
दिवाली पर बोनस मिलने की उम्मीद कर रहे कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे त्योहार पर मिलने वाले अतिरिक्त लाभ और कानून के तहत मिलने वाले बोनस के बीच अंतर समझें। यदि कंपनी कानूनी रूप से अनिवार्य भुगतान नहीं करती है, तो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं।