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Divorce & Joint Loan: आपसी सहमति से तलाक के बाद भी बैंक वसूलेगा आपसे पैसा! जानिए क्या कहता है बैंकिंग नियम

 

अगर पति-पत्नी ने मिलकर होम लोन लिया है और बाद में दोनों का तलाक हो जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक के साथ किया गया लोन एग्रीमेंट अपने आप खत्म हो जाएगा। रिश्ता टूटने के बावजूद दोनों बैंक के लिए को-बॉरोअर (Co-borrower) बने रह सकते हैं। जब तक पूरा लोन चुकता नहीं हो जाता या बैंक आधिकारिक तौर पर लोन की शर्तों में बदलाव को मंजूरी नहीं देता, तब तक दोनों की जिम्मेदारी बनी रहती है।

तलाक के बाद लोन चुकाने के क्या हैं विकल्प?

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन को लेकर दोनों पार्टनर कई विकल्प अपना सकते हैं।

1. एक पार्टनर अपने नाम कर सकता है लोन और घर

अगर दोनों में से कोई एक घर अपने पास रखना चाहता है, तो वह बचे हुए लोन और प्रॉपर्टी के मालिकाना हक को अपने नाम ट्रांसफर कराने के लिए बैंक से संपर्क कर सकता है। बैंक इसके लिए उसकी आय, क्रेडिट स्कोर और लोन चुकाने की क्षमता की जांच करेगा। बैंक की मंजूरी मिलने के बाद ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

2. घर बेचकर लोन चुकाना

दूसरा विकल्प घर को बेचकर उससे मिली रकम से बैंक का बचा हुआ लोन चुकाना है। लोन पूरा चुकाने के बाद अगर रकम बचती है, तो दोनों पार्टनर आपसी सहमति के अनुसार उस रकम का बंटवारा कर सकते हैं।

3. दोनों मिलकर EMI भरते रहें

अगर दोनों पार्टनर आपसी सहमति से घर और लोन को जारी रखना चाहते हैं, तो लोन खत्म होने तक तय हिस्से के मुताबिक EMI का भुगतान करते रह सकते हैं। हालांकि, इसके लिए दोनों के बीच स्पष्ट लिखित समझौता होना बेहतर है।

तलाक से बैंक का लोन कॉन्ट्रैक्ट खत्म नहीं होता

सबसे जरूरी बात यह है कि तलाक होने से बैंक के साथ किया गया लोन एग्रीमेंट अपने आप नहीं बदलता। बैंक के लिए प्राथमिकता लोन की रकम और उसकी समय पर अदायगी होती है। इसलिए जॉइंट होम लोन लेने वाले दोनों व्यक्ति तब तक जिम्मेदार रह सकते हैं, जब तक बैंक आधिकारिक तौर पर किसी एक व्यक्ति को लोन से बाहर नहीं करता।

इसी वजह से जॉइंट होम लोन लेते समय को-ओनरशिप एग्रीमेंट या अन्य कानूनी व्यवस्था के जरिए यह स्पष्ट करना समझदारी है कि भविष्य में विवाद या अलगाव की स्थिति में EMI कौन भरेगा और प्रॉपर्टी पर किसका अधिकार रहेगा।

EMI नहीं भरने पर दोनों का CIBIL स्कोर हो सकता है प्रभावित

अगर तलाक के बाद एक पार्टनर EMI भरना बंद कर देता है और लोन में डिफॉल्ट होता है, तो इसका असर दूसरे को-बॉरोअर पर भी पड़ सकता है। समय पर EMI नहीं भरने की स्थिति में दोनों के क्रेडिट रिकॉर्ड और CIBIL स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अगर तलाक की प्रक्रिया के दौरान कोर्ट किसी एक पार्टनर को लोन चुकाने का निर्देश भी देता है, तब भी बैंक के रिकॉर्ड में दोनों की जिम्मेदारी तब तक बनी रह सकती है, जब तक बैंक औपचारिक रूप से लोन की जिम्मेदारी में बदलाव को मंजूरी नहीं देता और संबंधित प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

इसलिए जॉइंट होम लोन लेने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि किसी आपात स्थिति या रिश्ते में बदलाव की स्थिति में क्या एक पार्टनर अकेले पूरी EMI चुकाने में सक्षम है या नहीं।