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Dairy Business: 10 देसी गायों की डेयरी खोलने पर मिल सकती है 11 लाख रुपये तक की मदद, जानें आवेदन का तरीका

 

गांव में डेयरी कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे किसानों और पशुपालकों के लिए देसी गायों का पालन कमाई का एक विकल्प बन सकता है। दूध की बिक्री से नियमित आमदनी के साथ गाय के गोबर का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में भी किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार देसी गोवंश के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए नंद बाबा मिशन के तहत पहल कर रही है।

इस योजना के तहत 10 देसी गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर 11 लाख रुपये तक की सहायता मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक अनुदान, पात्रता और आवेदन की शर्तों की पुष्टि संबंधित जिले के पशुपालन विभाग से करना जरूरी है। सहायता मिलना योजना के नियमों और स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

10 गायों की डेयरी पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?

नंद बाबा मिशन के तहत देसी गायों की डेयरी शुरू करने के इच्छुक पशुपालक सरकारी सहायता की जानकारी ले सकते हैं। 10 गायों की यूनिट के लिए 11 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान बताया जा रहा है। यह राशि सभी आवेदकों को मिलना तय नहीं है। अनुदान की सीमा, लाभार्थियों की पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी जिले के अधिकारियों से प्राप्त करनी चाहिए।

डेयरी शुरू करने से पहले पशुपालक यह भी पता कर लें कि सहायता किन खर्चों पर मिलेगी और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं।

डेयरी के लिए कौन-सी देसी गाय खरीदें?

डेयरी कारोबार की सफलता के लिए सही नस्ल और स्वस्थ पशुओं का चयन अहम है। साहीवाल और रेड सिंधी जैसी देसी नस्लें दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। गाय खरीदते समय उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध देने की क्षमता, पहले के दुग्ध उत्पादन और प्रजनन संबंधी जानकारी की जांच करें।

इसके साथ पशुओं के लिए साफ-सुथरा शेड, पर्याप्त जगह, पीने के पानी और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सुविधा का इंतजाम भी जरूरी है।

सेक्स्ड सीमन तकनीक से बढ़ सकती है बछिया की संभावना

डेयरी में भविष्य के लिए दूध देने वाली गायों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से सेक्स्ड सीमन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मादा बछिया पैदा होने की संभावना बढ़ती है, लेकिन इसकी शत-प्रतिशत गारंटी नहीं होती। इस तकनीक को अपनाने से पहले पशु चिकित्सक या प्रशिक्षित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

चारे पर खर्च घटाने के लिए करें यह काम

गाय पालन में चारे का खर्च कारोबार की लागत का बड़ा हिस्सा होता है। किसान के पास जमीन उपलब्ध है, तो वह हरा चारा उगाकर खर्च कम कर सकता है। मल्टीकट चरी जैसी फसलें बार-बार चारा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती हैं।

पशुओं को संतुलित आहार और साफ पानी देने के साथ नियमित टीकाकरण, समय पर उपचार और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। इससे पशुओं की सेहत बनाए रखने और दूध उत्पादन में मदद मिल सकती है।

कहां और कैसे करें आवेदन?

उत्तर प्रदेश में देसी गायों की डेयरी यूनिट लगाने के इच्छुक किसान अपने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी या पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं। वहां नंद बाबा मिशन के तहत उपलब्ध योजनाओं, पात्रता, अनुदान की राशि, जरूरी दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लें।

डेयरी शुरू करने से पहले गायों की खरीद, शेड निर्माण, चारा, पानी और इलाज का पूरा बजट तैयार करें। योजना की शर्तों और सहायता की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम निवेश करने से बचें।