सावधान! सितंबर में कई दिन ठप रहेंगी बैंकिंग सेवाएं, जाने से पहले चेक करें स्ट्राइक की तारीखें
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही 5 दिन काम और 2 दिन छुट्टी की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होने जा रहा है। पेंशन अपडेटेशन समेत कई अन्य लंबित मांगों को लेकर बैंक यूनियनों ने अगले महीने देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के 9 प्रमुख संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 11 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने का फैसला लिया है। यूनियनों का कहना है कि सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
11 सितंबर के बाद भी बढ़ सकता है आंदोलन
UFBU के मुताबिक, 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को लेकर दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसी के विरोध में 11 सितंबर को हड़ताल का आह्वान किया गया है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर समाधान नहीं निकला तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जा सकती है। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का विकल्प भी रखा गया है। UFBU ने बताया कि यह फैसला रविवार को हुई संगठन की बैठक में लिया गया। यूनियनों के मुताबिक, सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से उनकी मांगों पर पर्याप्त प्रगति नहीं होने के कारण आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है असर
अगर प्रस्तावित हड़तालें होती हैं तो देशभर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। खास तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शाखा संचालन, बैंकिंग लेनदेन, चेक क्लियरिंग और अन्य नियमित सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
5 दिन काम और शनिवार-रविवार छुट्टी की मांग
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था शामिल है। UFBU के अनुसार, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट के तहत इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी।
प्रस्ताव के अनुसार, सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी की जानी थी और शनिवार को छुट्टी दी जानी थी। यूनियनों का दावा है कि प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने के बावजूद दो साल से अधिक समय बीत चुका है और इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
Performance Linked Incentive का भी विरोध
UFBU ने बैंक अधिकारियों के लिए लागू की जा रही Performance Linked Incentive (PLI) योजना पर भी आपत्ति जताई है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था और IBA के साथ हुई सहमति के बीच अंतर है।
UFBU के मुताबिक, सरकारी योजना के तहत स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के मूल वेतन के बराबर PLI मिल सकता है। वहीं कर्मचारी वर्ग और स्केल-III तक के अधिकारियों के लिए अधिकतम प्रोत्साहन राशि 15 दिनों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर रखी गई है।
यूनियनों का तर्क है कि प्रोत्साहन व्यवस्था सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित होने के बजाय बैंक के समग्र प्रदर्शन से जुड़ी होनी चाहिए और सभी कैडरों के लिए समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पेंशन से जुड़ी भी कई मांगें
UFBU की अन्य प्रमुख मांगों में पेंशन अपडेटेशन, पेंशनधारकों के लिए समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला और NPS के दायरे में आने वाले बैंक कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देना शामिल है। अब 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के साथ बैंक यूनियनों और सरकार के बीच इन मांगों को लेकर टकराव बढ़ने के आसार हैं।