फेस्टिव सीजन की बंपर शुरुआत: गणेशोत्सव में 50 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान, छोटे व्यापारियों की बल्ले-बल्ले
देशभर में आज से गणेश चतुर्थी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। घरों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही है और हर तरफ उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है। लेकिन इस बार गणेशोत्सव सिर्फ आस्था और भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि कारोबार के लिहाज से भी बेहद खास माना जा रहा है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT के मुताबिक, इस साल गणेशोत्सव के दौरान देशभर में 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान है। CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस साल कारोबार में करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
आज से शुरू हुआ गणेशोत्सव 25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा। इस दौरान करोड़ों लोग अपने घरों में गणपति की स्थापना करेंगे। कोई एक दिन, कोई तीन दिन, कोई पांच दिन तो कोई पूरे दस दिनों तक गणेश जी की पूजा करेगा।
इसके अलावा देशभर में सार्वजनिक स्थानों पर हजारों बड़े और छोटे पंडाल बनाए गए हैं, जहां गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन पंडालों में दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
गणेशोत्सव से हजारों कारोबारियों को फायदा
गणेशोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों और स्थानीय कारीगरों को भी काम मिलता है।
गणेश प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों से लेकर पंडाल तैयार करने वाले कारीगर, सजावट करने वाले कलाकार, फूल विक्रेता, हस्तशिल्प से जुड़े लोग, बुनकर, टेंट कारोबारी, लाइट और साउंड टेक्नीशियन और छोटे दुकानदार—इन सभी के लिए गणेशोत्सव कमाई का बड़ा मौका लेकर आता है।
इसके अलावा मिठाई, फल, पूजा सामग्री, कपड़े, गिफ्ट आइटम, फूल और प्रसाद से जुड़े कारोबार में भी तेजी आती है।
यानी गणपति उत्सव के साथ सिर्फ धार्मिक गतिविधियां नहीं बढ़तीं, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी कारोबार तेजी से बढ़ता है।
2024 में 30 हजार करोड़ से अब 50 हजार करोड़ का अनुमान
CAIT के मुताबिक, 2024 में गणेशोत्सव से जुड़े कारोबार का अनुमान करीब 30 हजार करोड़ रुपये था। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 30 से 40 हजार करोड़ रुपये के बीच पहुंच गया।
अब 2026 में यह कारोबार 50 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। बड़े स्तर पर गणेश पंडालों का आयोजन, लोगों के खर्च में बढ़ोतरी, धार्मिक पर्यटन, इवेंट मैनेजमेंट, सजावट, खान-पान और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है।
'वोकल फॉर लोकल' को भी मिल रहा बढ़ावा
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान का असर इस साल गणेशोत्सव के बाजारों में भी देखने को मिल रहा है।
उनके मुताबिक, गणेश प्रतिमाओं से लेकर सजावट की सामग्री, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, कपड़े और कई दूसरी चीजों में स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ी है।
इससे छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों को सीधे फायदा मिल रहा है।
किन चीजों पर सबसे ज्यादा खर्च?
गणेशोत्सव के दौरान होने वाले कारोबार में कई तरह के सेक्टर शामिल हैं।
गणेश प्रतिमाओं की बिक्री, पंडाल निर्माण, लाइटिंग और सजावट, फूल और पूजा सामग्री, प्रसाद और मिठाई, ड्राई फ्रूट, फल, कैटरिंग, कपड़े और गिफ्ट आइटम के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, होटल, पर्यटन और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कारोबार को भी बड़ा फायदा मिलता है।
इसके अलावा विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप से जुड़ी गतिविधियां भी इस दौरान तेज हो जाती हैं।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु समेत देश के कई राज्यों में गणेशोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है।
इन राज्यों में लाखों मूर्तिकार, फूल विक्रेता, मिठाई कारोबारी, सजावट विशेषज्ञ, टेंट हाउस संचालक, साउंड और लाइट तकनीशियन, परिवहन कर्मचारी और छोटे व्यापारी इस त्योहार से अपनी कमाई करते हैं।
इको-फ्रेंडली पंडालों की बढ़ी मांग
इस साल गणेश पंडालों में पर्यावरण-अनुकूल सजावट भी लोगों को काफी आकर्षित कर रही है।
केले के पत्ते, गेंदे के फूल, प्राकृतिक कपड़े, मिट्टी के दीपक, बांस और हाथ से तैयार की गई सजावटी सामग्री से पंडाल सजाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर, पंचतत्व, भारतीय संस्कृति, महाराष्ट्र की पारंपरिक कला, मंदिर वास्तुकला, ग्रामीण भारत और 'वोकल फॉर लोकल' जैसी थीम पर आधारित पंडाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
त्योहारी सीजन से अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा
गणेशोत्सव के बाद देश में त्योहारों का सिलसिला और तेज होने वाला है।
गणेश चतुर्थी के बाद नवरात्र, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, दीपावली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार आएंगे। इसके बाद देश में शादी का सीजन भी शुरू होगा।
ऐसे में आने वाले महीनों में बाजार में खरीदारी और कारोबार का सिलसिला लगातार जारी रहने की उम्मीद है।
CAIT का मानना है कि गणेश चतुर्थी अब सिर्फ आस्था और भक्ति का पर्व नहीं रह गया है। यह स्थानीय कारोबार, रोजगार और छोटे उद्योगों के लिए भी एक बड़ा आर्थिक अवसर बन चुका है।
इस साल अगर गणेशोत्सव से 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होता है, तो यह सिर्फ त्योहार की बढ़ती लोकप्रियता नहीं दिखाएगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भारत के स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारी देश की अर्थव्यवस्था में कितनी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।