Bihar Farmer Scheme 2026: गेंदे की खेती करने वाले किसानों को वाहन खरीदने पर मिलेगी ₹3.25 लाख तक सब्सिडी, जानें आवेदन का तरीका
बिहार में गेंदा फूल की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। फसल तैयार होने के बाद फूलों को बाजार तक पहुंचाने में होने वाली परेशानी कम करने के लिए राज्य सरकार माल ढोने वाला वाहन खरीदने पर अनुदान दे रही है। इसके तहत पात्र किसानों को वाहन की लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 3.25 लाख रुपये है। इसके अलावा गेंदा फूल की खेती करने पर भी किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
यह सुविधा बिहार उद्यान निदेशालय की गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना 2026-27 के तहत दी जा रही है। योजना का उद्देश्य फूलों के उत्पादन के साथ-साथ उनकी ढुलाई को आसान बनाना और किसानों की लागत कम करने में मदद करना है।
वाहन खरीदने पर मिलेगी 3.25 लाख रुपये तक की मदद
गेंदा फूल की खेती करने वाले किसानों को अक्सर फसल तैयार होने के बाद उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए छोटे मालवाहक वाहन किराये पर लेने पड़ते हैं। इससे किसानों का खर्च बढ़ जाता है और समय पर वाहन नहीं मिलने पर फूलों की बिक्री में भी परेशानी हो सकती है।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत माल ढोने वाले वाहन की अनुमानित इकाई लागत 6.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत तक अनुदान देगी।
- वाहन की निर्धारित इकाई लागत: 6.50 लाख रुपये
- अनुदान की दर: 50 प्रतिशत तक
- अधिकतम सरकारी सहायता: 3.25 लाख रुपये
अगर किसान द्वारा खरीदे जाने वाले वाहन की कीमत निर्धारित लागत से कम है, तो अनुदान वास्तविक पात्र लागत के आधार पर तय होगा। यह सुविधा योजना के तहत गेंदा फूल की खेती करने वाले पात्र किसानों के लिए है।
गेंदा की खेती पर भी मिलेगा 40 हजार रुपये तक अनुदान
सरकार की इस योजना में केवल वाहन खरीदने पर ही सहायता नहीं मिलेगी, बल्कि गेंदा फूल की खेती के लिए भी अनुदान का प्रावधान है।
योजना के मुताबिक, गेंदा की खेती की इकाई लागत 80,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। इस पर 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 40,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान मिल सकता है।
किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर जमीन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए योजना में निर्धारित पात्रता और अन्य शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
25 हेक्टेयर के क्लस्टर में करनी होगी खेती
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को एक महत्वपूर्ण शर्त का ध्यान रखना होगा। गेंदा फूल की खेती 25 हेक्टेयर के क्लस्टर में कराई जाएगी। एक क्लस्टर में एक पंचायत या दो आसपास की पंचायतों के क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं।
किसानों को निर्धारित क्लस्टर के भीतर ही आवेदन करना होगा। क्लस्टर से बाहर आवेदन करने पर उसे अस्वीकार किया जा सकता है। इसलिए आवेदन से पहले किसान अपने क्षेत्र के क्लस्टर और उसकी पात्रता की जानकारी संबंधित उद्यान कार्यालय से जरूर प्राप्त कर लें।
अपनी जमीन नहीं है तो भी कर सकते हैं आवेदन
जिन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं है, उनके लिए भी योजना का लाभ लेने की संभावना है। ऐसे किसानों को पट्टे या किराये पर ली गई जमीन से संबंधित वैध इकरारनामा प्रस्तुत करना होगा।
इसके अलावा, जरूरत के अनुसार जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ सकते हैं। इनमें भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (LPC), अद्यतन जमीन की रसीद और नाम स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में वंशावली जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
किसानों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पहले दस्तावेजों की सूची और उनकी अनिवार्यता की पुष्टि कर लें, ताकि आवेदन में कोई कमी न रह जाए।
31 दिसंबर 2026 तक कर सकते हैं आवेदन
दी गई जानकारी के अनुसार, गेंदा फूल उत्पादन एवं प्रसंस्करण योजना 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 से शुरू हुई है। आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 निर्धारित बताई गई है।
किसान बिहार उद्यान निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपना 13 अंकों का DBT किसान पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा और संबंधित योजना का चयन करना होगा।
वाहन खरीदने पर अनुदान के लिए आवेदन करने वाले किसानों को वाहन का कोटेशन, जमीन से संबंधित दस्तावेज और गेंदा फूल की खेती से जुड़ा इकरारनामा सहित मांगे गए कागजात अपलोड करने पड़ सकते हैं।
आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- किसान का DBT पंजीकरण नंबर उपलब्ध होना चाहिए।
- खेती निर्धारित क्लस्टर के अंतर्गत होनी चाहिए।
- जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
- वाहन पर अनुदान के लिए निर्धारित प्रारूप में कोटेशन और अन्य मांगे गए कागजात जमा करें।
- अंतिम तारीख से पहले आवेदन पूरा करें।
ध्यान दें: अनुदान की राशि, पात्रता, आवेदन की समयसीमा और जरूरी दस्तावेजों की अंतिम पुष्टि बिहार उद्यान निदेशालय के आधिकारिक पोर्टल या संबंधित जिला उद्यान कार्यालय से कर लें।