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BIG UPDATE: 8th Pay Commission में ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग तेज, जानिए किस मोड़ पर अटक रही बात

 

देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग के जरिए उनकी सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़ा सुधार हो सकता है। लेकिन इसी के साथ एक पुरानी मांग ने भी जोर पकड़ लिया है और वह है पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली।

8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही कर्मचारी संगठन और अलग-अलग यूनियन लगातार सरकार के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि NPS और UPS के बजाय पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाना चाहिए, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को निश्चित और मजबूत आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

OPS की बहाली पर क्यों अड़े कर्मचारी संगठन?

कर्मचारी संगठनों और रेलवे यूनियनों का तर्क है कि नई पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को वह सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा नहीं देती, जो पुरानी पेंशन योजना के तहत मिलती थी।

OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलने की व्यवस्था थी, जबकि NPS में मिलने वाला रिटर्न बाजार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों को चिंता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव का असर भविष्य की पेंशन पर भी पड़ सकता है।

यही वजह है कि यूनियनों की प्रमुख मांगों में NPS को हटाकर OPS की बहाली सबसे ऊपर बनी हुई है।

हालांकि, दूसरी तरफ आर्थिक और कानूनी विशेषज्ञ इस मांग को लेकर अलग राय रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि OPS को दोबारा लागू करने से सरकार के खजाने पर लंबे समय तक बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इससे सरकार के विकास और अन्य सामाजिक योजनाओं के बजट पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

NPS और UPS से कर्मचारियों को क्या परेशानी है?

कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी चिंता रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि OPS के दौरान पेंशन एक निश्चित फॉर्मूले के आधार पर मिलती थी, जबकि NPS में निवेश और बाजार के प्रदर्शन का प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार ने NPS में सुधार के उद्देश्य से यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS का विकल्प भी पेश किया है, लेकिन कई कर्मचारी संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें पूरी तरह पुरानी पेंशन व्यवस्था ही चाहिए।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं 5 बड़ी मांगें

8वें वेतन आयोग की बैठकों के दौरान कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लगातार अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं। हाल ही में चेन्नई में हुई बैठक में पेंशनर्स फोरम की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।

पहली और सबसे बड़ी मांग OPS की बहाली है। कर्मचारी संगठनों ने NPS को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग की है।

दूसरी मांग न्यूनतम सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी की है। संगठनों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹68,000 किया जाए। साथ ही बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन में भी सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए। इसके अलावा हर 10 साल में वेतन संशोधन की बजाय एक स्थायी वेज-रिविजन व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई गई है।

तीसरी मांग कम्यूटेड पेंशन को लेकर है। पेंशन कम्यूटेशन की राशि की रिकवरी और उससे जुड़े नियमों को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स की ओर से राहत देने की मांग की गई है।

चौथी मांग MACP यानी Modified Assured Career Progression से जुड़ी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रमोशन और वेतन वृद्धि से जुड़े लाभों को बेहतर किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के करियर ग्रोथ और पे-स्केल में सुधार हो।

पांचवीं मांग बेहतर भत्तों, लीव रूल्स और सोशल सिक्योरिटी कवर को लेकर है। कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन चाहते हैं कि नए वेतन आयोग में उनके आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी मजबूत किया जाए।

सिविल कर्मचारियों के लिए OROP की मांग पर क्या कहा गया?

कर्मचारी संगठनों की ओर से सिविलियन कर्मचारियों के लिए वन रैंक, वन पेंशन यानी OROP जैसी व्यवस्था की मांग भी उठाई गई है।

हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सिविल सेवाओं की संरचना सशस्त्र बलों से अलग होती है। अलग-अलग विभाग, कैडर और भर्ती वर्ष होने के कारण सभी कर्मचारियों के लिए एक जैसा OROP फॉर्मूला लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे भविष्य में नई असमानताएं पैदा होने की संभावना भी जताई गई है।

वहीं पुराने पेंशनर्स के अधिकारों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि पेंशन और ग्रेच्युटी को कर्मचारियों द्वारा अर्जित अधिकार माना जाता है। इसलिए नए बदलावों को लागू करते समय पुराने पेंशनर्स के मौजूदा लाभों को प्रभावित करने के बजाय भविष्य में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों पर नई व्यवस्था लागू करना ज्यादा उचित रास्ता हो सकता है।

क्या सरकार OPS वापस लाएगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 8वें वेतन आयोग के जरिए सरकार पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह वापस लाएगी?

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों को OPS की पूरी बहाली की संभावना कम नजर आ रही है। हालांकि कर्मचारियों की मांगों और उनकी आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए सरकार UPS में कुछ और सुधार करने पर विचार कर सकती है।

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी जारी है और आने वाले समय में कर्मचारी संगठनों की मांगों, सरकार की आर्थिक स्थिति और आयोग की सिफारिशों के आधार पर तस्वीर और साफ हो सकती है।

आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना बताई गई है। वहीं 16 से 18 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में अगली बैठक प्रस्तावित है।

फिलहाल कर्मचारियों की सबसे बड़ी नजर सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी के साथ-साथ OPS की मांग पर है। ऐसे में आने वाले महीनों में 8वें वेतन आयोग से जुड़े फैसले करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाल सकते हैं।