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कम निवेश में बड़ा मुनाफा: माइक्रोग्रीन्स खेती बनी शहरी किसानों की नई उम्मीद, 7–14 दिनों में तैयार फसल की बढ़ी मांग

 

आज के समय में जब खेती में कम लागत और अधिक मुनाफे की तलाश तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में माइक्रोग्रीन्स की खेती किसानों और शहरी उद्यमियों के लिए एक शानदार विकल्प बनकर उभर रही है। बेहद कम जगह और सीमित संसाधनों में की जाने वाली यह खेती न केवल आसान है, बल्कि बेहद कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा भी देती है। महज 7 से 14 दिनों के भीतर तैयार होने वाली माइक्रोग्रीन्स फसल की बाजार में तेजी से बढ़ती मांग इसे और भी आकर्षक बना रही है।

माइक्रोग्रीन्स दरअसल सब्जियों और जड़ी-बूटियों के शुरुआती पौधे होते हैं, जिन्हें अंकुरण के कुछ ही दिनों बाद काट लिया जाता है। इनमें मूली, सरसों, मेथी, धनिया, पालक और ब्रोकली जैसे पौधों के छोटे-छोटे हरे अंकुर शामिल होते हैं। पोषण की दृष्टि से ये बेहद समृद्ध माने जाते हैं, क्योंकि इनमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा काफी अधिक होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोग्रीन्स की खेती के लिए बड़े खेतों की जरूरत नहीं होती। इसे बालकनी, छत, छोटे कमरे या कंटेनर सिस्टम में भी आसानी से उगाया जा सकता है। यही वजह है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले युवा, गृहिणियां और स्टार्टअप शुरू करने वाले लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं। कम पानी, कम समय और कम निवेश के कारण यह खेती छोटे किसानों के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।

बाजार में माइक्रोग्रीन्स की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर होटल, रेस्टोरेंट और हेल्थ-कॉन्शस ग्राहकों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। बड़े शहरों में इसे सलाद, सूप और हेल्दी डाइट प्लान में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोग्रीन्स सामान्य सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिससे यह सुपरफूड की श्रेणी में शामिल हो गया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोग्रीन्स की खेती शुरू करने के लिए बहुत अधिक तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। केवल अच्छी गुणवत्ता के बीज, साफ पानी, उचित रोशनी और स्वच्छ वातावरण की जरूरत होती है। शुरुआती स्तर पर इसे 1,000 से 5,000 रुपये तक की छोटी लागत से भी शुरू किया जा सकता है, जिससे यह एक कम जोखिम वाला व्यवसाय बन जाता है।

तेजी से बदलते लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते माइक्रोग्रीन्स का बाजार आने वाले वर्षों में और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह क्षेत्र शहरी कृषि (Urban Farming) के सबसे मजबूत विकल्पों में से एक बन सकता है।