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एथेनॉल खरीद के नियमों में केंद्र सरकार का बड़ा बदलाव! गन्ने और चीनी से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक, मक्का-चावल को मिलेगा बढ़ावा

 

केंद्र सरकार ने एथेनॉल खरीदने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए जारी टेंडर में लागू की गई है।

सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और चीनी की कीमतों पर दबाव कम करना है। नए नियमों के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी आधारित कच्चे माल के इस्तेमाल को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मक्का, चावल और अन्य अनुमोदित स्रोतों से तैयार एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी।

तेल कंपनियां खरीदेंगी करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने मिलकर करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक एथेनॉल की आपूर्ति की जाएगी।नए टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल के लिए बोली स्वीकार नहीं की जाएगी। हालांकि, दूसरे निर्धारित कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद की व्यवस्था जारी रहेगी।

मक्का और चावल से बने एथेनॉल की कीमत कितनी होगी?

सरकार ने अलग-अलग कच्चे माल से तैयार एथेनॉल के लिए आधार कीमतें तय की हैं। इनके अनुसार:

  • मक्का से बना एथेनॉल: ₹66.07 प्रति लीटर, साथ में ₹2.79 प्रति लीटर अतिरिक्त प्रोत्साहन।

  • खराब खाद्यान्न से बना एथेनॉल: ₹64 प्रति लीटर।

  • FCI के अतिरिक्त चावल से बना एथेनॉल: ₹60.32 प्रति लीटर।

  • C-हैवी शीरे से बना एथेनॉल: ₹57.97 प्रति लीटर।

इन कीमतों में GST और परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। ये शुल्क अलग से देय होंगे। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत मंजूर अन्य कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की खरीद टेंडर में निर्धारित सबसे कम लागू दर के अनुसार की जाएगी।

चार चरणों में होगी एथेनॉल की सप्लाई

नए सप्लाई वर्ष में एथेनॉल की आपूर्ति चार चरणों में की जाएगी।

  1. पहला चरण: नवंबर 2026 से जनवरी 2027

  2. दूसरा चरण: फरवरी से अप्रैल 2027

  3. तीसरा चरण: मई से जुलाई 2027

  4. चौथा चरण: अगस्त से अक्टूबर 2027

टेंडर की शर्तों के अनुसार, चौथे चरण में भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की आपूर्ति के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

कोर्ट के फैसले से बदल सकता है एथेनॉल का आवंटन

टेंडर में एथेनॉल के आवंटन को लेकर भी शर्तें रखी गई हैं। पहली तिमाही में होने वाला आवंटन कुछ लंबित कानूनी मामलों के फैसले पर निर्भर करेगा। ये मामले तेल कंपनियों के बीच एथेनॉल के वितरण की प्रक्रिया से जुड़े हैं।यदि अदालत के आदेश के कारण बदलाव की जरूरत पड़ती है, तो तेल कंपनियां आवंटन घटा सकती हैं या उसे रद्द भी कर सकती हैं। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कंपनियां सप्लायर को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होंगी।

सप्लायर के लिए भी सख्त नियम

नए टेंडर के तहत सप्लायर को मंजूर कच्चे माल से एथेनॉल अपनी ही पंजीकृत या स्वीकृत डिस्टिलरी में तैयार करना होगा। कोई सप्लायर किसी तीसरे पक्ष से एथेनॉल खरीदकर सरकारी तेल कंपनियों को नहीं बेच सकेगा।

सरकार ने क्यों बदले नियम?

सरकार का उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन में चीनी और गन्ने पर निर्भरता कम करना तथा चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखना है। मक्का और चावल जैसे दूसरे कच्चे माल से एथेनॉल बनाने को बढ़ावा मिलने से उत्पादन के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक असर चीनी की कीमतों, किसानों, डिस्टिलरी उद्योग और एथेनॉल उत्पादन पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले सप्लाई वर्ष में मांग, उत्पादन और खरीद के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।