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त्योहारों से पहले बड़ा झटका! RBI की चेतावनी के बाद महंगे होंगे लोन और EMI, फेस्टिव शॉपिंग पर पड़ सकता है असर

 

महंगाई को काबू में रखने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर दी है। अब रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। करीब चार साल बाद RBI ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है और यह फैसला त्योहारी सीजन से ठीक पहले लिया गया है, जब देश में खरीदारी और खर्च तेजी से बढ़ता है।RBI का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में देश की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।

रेपो रेट क्या होता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI दूसरे बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है।जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक भी ग्राहकों को महंगे ब्याज पर लोन देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है।महंगा कर्ज होने पर लोग कम लोन लेते हैं और खर्च घटाते हैं। मांग कम होने से महंगाई पर दबाव कम करने में मदद मिलती है। यही RBI की मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य है।

RBI का फोकस अब महंगाई पर

RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों का ऐलान किया।RBI ने अपना रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। आने वाली बैठकों में RBI दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है या महंगाई का दबाव बढ़ने पर फिर बढ़ोतरी कर सकता है।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक 0.25% की बढ़ोतरी बाजार की उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन असली बदलाव RBI के रुख में है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल महंगाई केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज के मुताबिक आने वाले समय में ब्याज दरों में 0.25% से 0.50% तक और बढ़ोतरी की संभावना हो सकती है।वहीं, DBS बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव का मानना है कि RBI महंगाई के खतरे को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना चाहता है, ताकि आगे चलकर इसका असर अर्थव्यवस्था पर ज्यादा न पड़े।

2026-27 में महंगाई 5.2% रहने का अनुमान

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। अलग-अलग तिमाहियों के लिए अनुमान इस तरह है:

अवधि नया अनुमान पुराना अनुमान
Q2 FY27 4.9% 4.7%
Q3 FY27 6.0% 5.9%
Q4 FY27 5.7% 5.5%
Q1 FY28 5.6% 5.3%

GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1%

महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी के साथ RBI ने आर्थिक विकास को लेकर अच्छी खबर दी है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।

अवधि नया अनुमान पुराना अनुमान
Q2 FY27 7.2% 6.4%
Q3 FY27 6.9% 6.5%
Q4 FY27 6.8% 6.8%
Q1 FY28 7.1% 7.3%

आम लोगों पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा है और वह रेपो रेट से जुड़ा है।

मौजूदा होम, कार और पर्सनल लोन:
अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो बैंक ब्याज दर बढ़ा सकते हैं। इसका असर EMI बढ़ने या लोन की अवधि लंबी होने के रूप में दिखाई दे सकता है।

नया लोन लेने वालों पर असर:
आने वाले दिनों में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की लागत बढ़ सकती है। ब्याज दर बढ़ने से कुछ ग्राहकों की लोन लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

आगे रेपो रेट कब घटेगा?

फिलहाल RBI ने ब्याज दरों में कटौती का रास्ता मुश्किल कर दिया है। अगर आने वाले महीनों में महंगाई लगातार नियंत्रण में रहती है और आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भविष्य में रेपो रेट में कटौती की संभावना बन सकती है।RBI हर मॉनिटरी पॉलिसी बैठक में महंगाई, GDP ग्रोथ, वैश्विक बाजार और देश की आर्थिक स्थिति को देखकर ब्याज दरों पर फैसला करता है।

रेपो रेट का कॉन्सेप्ट कहां से आया?

रेपो सिस्टम की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका के बैंकिंग सिस्टम में हुई थी। इसका मकसद बैंकों को कम अवधि के लिए फंड उपलब्ध कराना और वित्तीय व्यवस्था में पैसों के प्रवाह को बनाए रखना था।समय के साथ रेपो सिस्टम में कई बदलाव हुए। आज दुनिया के कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के मौद्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।भारत में भी RBI रेपो रेट के जरिए बैंकिंग सिस्टम में पैसों के प्रवाह, महंगाई और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। यही वजह है कि RBI के रेपो रेट का फैसला आम लोगों की EMI से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक पर असर डाल सकता है।