Bhiwandi News: बारिश की कमी से 16,221 हेक्टेयर में धान की फसल पर संकट, किसानों ने मांगी सरकारी मदद
महाराष्ट्र के भिवंडी में धान की खेती करने वाले किसान इस साल बारिश की अनियमितता से परेशान हैं। खेतों में फसल तैयार करने के लिए किसानों ने बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर काफी खर्च किया है, लेकिन बारिश में लंबे अंतराल के कारण अब पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर उत्पादन कम हुआ, तो खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक, भिवंडी में करीब 16,221 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी फसल खराब हो गई है। वास्तविक नुकसान का आकलन खेतों की स्थिति की जांच के बाद ही हो सकेगा।
बारिश में लंबे अंतराल से फसल की बढ़वार प्रभावित
भिवंडी में इस साल मानसून के दौरान बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 1 से 23 जून के बीच करीब 23 दिनों तक बारिश नहीं हुई। इसके बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के दौरान भी लगभग 23 से 24 दिनों तक बारिश का लंबा अंतराल रहा।
धान की फसल को अलग-अलग चरणों में पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। बारिश में देरी या लंबे अंतराल से पौधों की बढ़वार, बालियां निकलने और दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को उत्पादन घटने की चिंता सता रही है।
भिवंडी में तीन तरह के धान की खेती
इस साल भिवंडी में मुख्य रूप से हलवा, निमगरवा और गरवा किस्मों की खेती की गई है। इन किस्मों को तैयार होने में अलग-अलग समय लगता है।
- हलवा धान: करीब 4,866 हेक्टेयर में खेती हुई है। इसकी फसल लगभग 90 से 115 दिनों में तैयार होती है।
- निमगरवा धान: लगभग 7,299 हेक्टेयर में लगाया गया है। इसे तैयार होने में करीब 110 से 130 दिन लगते हैं।
- गरवा धान: करीब 4,055 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हुई है। फसल को पकने में लगभग 125 से 150 दिन लगते हैं।
बारिश की कमी का इन किस्मों पर कितना असर पड़ा है, यह फसल की मौजूदा स्थिति और खेतों के सर्वे के बाद स्पष्ट होगा।
खेती की लागत निकालने की चिंता
धान की खेती के लिए किसानों को बीज, खाद, खेत तैयार करने, रोपाई और मजदूरी पर पैसा खर्च करना पड़ता है। यदि फसल की पैदावार कम होती है, तो किसानों की आमदनी घट सकती है और उनके लिए खेती में लगाया गया पैसा वापस निकालना मुश्किल हो सकता है।
इसका असर केवल मौजूदा फसल तक सीमित नहीं रहेगा। कम आमदनी होने पर किसानों को अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी सामान खरीदने में भी परेशानी हो सकती है।
किसानों ने सरकार से की सर्वे और मुआवजे की मांग
भिवंडी की महिला किसान द्रौपदी पाटिल समेत प्रभावित किसानों ने सरकार से मदद की मांग की है। किसानों का कहना है कि प्रशासन को खेतों में जाकर फसल की स्थिति का सर्वे करना चाहिए, ताकि बारिश की कमी से हुए नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
किसान चाहते हैं कि सर्वे जल्द पूरा हो और पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता दी जाए। फिलहाल, 16,221 हेक्टेयर खेती का आंकड़ा कुल धान उत्पादन क्षेत्र को दर्शाता है, न कि पूरी तरह बर्बाद हुई फसल को।
अब किसानों की नजर प्रशासनिक सर्वे पर है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि कितने क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है और किसानों को कितनी सहायता की जरूरत होगी।