बैंक एफडी टिप्स: ₹10 लाख के बैंक डिपॉजिट पर अधिकतम ब्याज कैसे कमाएं? समझें लेडरिंग और सुरक्षा का पूरा गणित
दा की रकम है, तो एक ही बैंक में पूरी राशि रखने के बजाय अलग-अलग बैंकों में बांटकर रखने से DICGC कवरेज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, अगर आपके पास ₹15 लाख हैं और आप इसे तीन अलग-अलग बैंकों में ₹5-₹5 लाख की पात्र जमा के रूप में रखते हैं, तो प्रत्येक बैंक के लिए अलग ₹5 लाख तक का DICGC कवर लागू हो सकता है।हालांकि, बैंक चुनते समय सिर्फ बीमा कवर ही नहीं, बल्कि बैंक की विश्वसनीयता, ब्याज दर, FD की अवधि और समय से पहले पैसा निकालने के नियम भी जरूर देखें।
अलग कानूनी क्षमता में जमा का नियम अलग हो सकता है
एक ही बैंक में अलग-अलग कानूनी क्षमता या स्वामित्व के तहत रखी गई जमाओं पर DICGC के नियम अलग तरीके से लागू हो सकते हैं। उदाहरण के लिए व्यक्तिगत और कुछ अलग श्रेणी के खातों को नियमों के अनुसार अलग-अलग क्षमता में देखा जा सकता है।
इसलिए बड़ी रकम निवेश करने से पहले बैंक से यह जरूर समझ लें कि आपकी अलग-अलग जमाएं DICGC के तहत किस तरह जोड़ी जाएंगी।
बैंक संकट में आने पर क्या होता है?
अगर किसी बैंक के लिक्विडेशन या RBI की ओर से लगाए गए प्रतिबंध जैसी स्थिति में DICGC का बीमा तंत्र लागू होता है, तो पात्र जमाकर्ताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा निपटाया जाता है।
ऐसी स्थिति में DICGC की अधिकतम बीमा सीमा ₹5 लाख प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक है। इसका मतलब यह नहीं है कि ₹5 लाख से ज्यादा जमा रकम हर स्थिति में तुरंत खो जाएगी; बल्कि ₹5 लाख DICGC की बीमित सीमा है। बाकी रकम की वापसी बैंक की स्थिति और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर कर सकती है।
FD कराने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
1. बैंक में कुल पैसा देखें:
सिर्फ FD नहीं, बल्कि उसी बैंक में मौजूद सेविंग अकाउंट, RD और अन्य पात्र जमा को भी कुल एक्सपोजर में शामिल करके देखें।
2. बड़ी रकम को बांटने पर विचार करें:
₹10 लाख या ₹15 लाख जैसी रकम को अलग-अलग बैंकों में बांटना DICGC कवर के लिहाज से उपयोगी हो सकता है।
3. सिर्फ ब्याज दर देखकर बैंक न चुनें:
FD की ब्याज दर के साथ बैंक की विश्वसनीयता, अवधि, प्रीमैच्योर विड्रॉल के नियम और आपकी जरूरत के अनुसार लिक्विडिटी भी देखें।