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बेटे के निधन ने बदला अनिल अग्रवाल का जीवन! किया 75% संपत्ति दान करने का ऐलान, जाने कैसे बने मेटल किंग 

 

वेदांता ग्रुप के फाउंडर अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में अचानक निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे की मौत पर गहरा दुख जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्निवेश अग्रवाल (49 साल) की मौत अमेरिका के न्यूयॉर्क में कार्डियक अरेस्ट से हुई।

कुछ दिन पहले स्कीइंग करते समय अग्निवेश घायल हो गए थे। इसके बाद उनका न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई। बेटे की मौत से वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल को गहरा सदमा लगा है। अनिल अग्रवाल ने यह खबर सोशल मीडिया पर शेयर की। अनिल अग्रवाल ने लिखा, "हमें लगा था कि बुरा वक्त खत्म हो गया है, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया।"

अपना दुख जताते हुए उन्होंने लिखा, "मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें बहुत जल्दी छोड़ दिया। वह सिर्फ 49 साल का था। जवान, जोशीला और सपनों से भरा हुआ। हमें लगा था कि अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया।" आइए जानते हैं अनिल अग्रवाल के बिजनेस करियर की शुरुआत से लेकर मेटल किंग बनने तक के सफर के बारे में...

अनिल अग्रवाल ने अपना बिजनेस कैसे शुरू किया और उनका शुरुआती जीवन

अनिल अग्रवाल का जन्म 24 जनवरी, 1954 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पटना के मिलर स्कूल से पूरी की। सीखने की ललक और दृढ़ संकल्प ने उन्हें देश के अग्रणी उद्योगपतियों में से एक बनाया। अनिल अग्रवाल के बिजनेस करियर की शुरुआत 1970 के दशक के मध्य में हुई, जब उन्होंने मेटल स्क्रैप का कारोबार शुरू किया। इसके तुरंत बाद, 1976 में, उन्होंने वेदांता की स्थापना की। शुरुआत में, वेदांता स्क्रैप मेटल के बिजनेस में शामिल थी। हालांकि, अपनी कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता से, अनिल अग्रवाल ने कंपनी का विस्तार किया और वेदांता को मेटल इंडस्ट्री में एक जाना-माना नाम बनाया। अनिल अग्रवाल को मेटल किंग के नाम से भी जाना जाता है।

देश और विदेश दोनों जगह अपनी पहचान बनाना

1986 में, उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना की, जिसने शुरू में जेली-फिल्ड केबल बनाना शुरू किया। कुछ ही सालों में, कंपनी का तेजी से विस्तार हुआ, और 1993 तक, यह देश की पहली प्राइवेट सेक्टर की कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी बन गई। उनके बिज़नेस में असली टर्निंग पॉइंट 2011 में आया, जब उन्होंने भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल की और उसके बाद हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में इन्वेस्ट किया। इन डील्स से वेदांता को एल्युमिनियम और जिंक सेक्टर में एक अलग पहचान मिली। 

अनिल अग्रवाल की नेट वर्थ कितनी है?

फोर्ब्स की जानकारी के अनुसार, 2026 में अनिल अग्रवाल की कुल नेट वर्थ लगभग ₹35,000 करोड़ होने का अनुमान है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में वेदांता का टर्नओवर लगभग ₹1,31,192 करोड़ तक पहुंच गया था। उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वेदांता से आता है।