ईरान वॉर के बीच शेयर बाजार में क्रैश, लेकिन सोना-चांदी खरीदने वालों की हुई खुशी, जानें आज की बड़ी गिरावट
ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन, गुरुवार की शुरुआत में एक ओर जहां शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और सेंसेक्स करीब 1800 अंक तक लुढ़क गया, वहीं दूसरी ओर सोना-चांदी खरीदारों के लिए राहत भरी खबर आई. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को फिर गिरावट दर्ज की गई.
कैसे तय होती है सोने और चांदी की कीमत?
सोने और चांदी के दाम रोजाना तय होते हैं और इनके पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार होते हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की कीमतें अमेरिकी डॉलर में निर्धारित होती हैं, इसलिए डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इनकी कीमतों पर पड़ता है. यदि डॉलर मजबूत होता है या रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोने और चांदी की कीमतें बढ़ जाती हैं.भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी), जीएसटी और अन्य स्थानीय कर भी इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं. इसके अलावा, वैश्विक बाजार में उथल-पुथल जैसे युद्ध, आर्थिक मंदी या ब्याज दरों में बदलाव का भी सोने की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है.जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक शेयरों या अन्य जोखिम भरे निवेशों की बजाय सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं. भारत में सोना केवल निवेश का माध्यम ही नहीं, बल्कि परंपरा और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. शादी-ब्याह, त्योहारों और अन्य शुभ अवसरों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है और कीमतों पर असर पड़ता है.
सोना-चांदी में बड़ी गिरावट
यूएस स्पॉट गोल्ड 1.22 प्रतिशत गिरकर 4836 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर 2.25 प्रतिशत टूटकर 75.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. वहीं घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर सोना करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी गिरकर लगभग 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई.लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, सोना और चांदी में हालिया उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता है.मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं. गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव को करीब तीन हफ्ते हो चुके हैं और फिलहाल शांति की कोई स्पष्ट उम्मीद नजर नहीं आ रही है. वहीं, उम्मीद के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, हालांकि इससे पहले लगातार तीन बार 0.25 प्रतिशत की दर से कटौती की गई थी.