AI से बदलता जॉब मार्केट: आईटी, वीडियो में जाने कानून और कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव, स्किल्स की नई चुनौती
देश के नौकरी बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, AI टूल्स ने कई पारंपरिक कार्यों को या तो काफी हद तक स्वचालित कर दिया है या फिर उनकी आवश्यकता को बेहद सीमित कर दिया है, जिनके लिए हर साल लाखों छात्र डिग्रियां हासिल करते हैं।
एचआर कंसल्टिंग कंपनी टीमलीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब करीब 40% कंपनियां “हाइब्रिड स्किल” को प्राथमिकता दे रही हैं। इसका मतलब यह है कि उम्मीदवार के पास केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे AI टूल्स की समझ और उनका व्यावहारिक उपयोग भी आना जरूरी हो गया है। कंपनियां ऐसे कर्मचारियों की तलाश में हैं जो तकनीक के साथ मिलकर तेजी से और अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकें।इस बीच नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट ने भी चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है। यह स्थिति भविष्य की नौकरियों के लिए एक बड़ी स्किल गैप की ओर इशारा करती है, जहां डिग्री और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि आने वाले समय में नौकरी उन्हीं लोगों के पास टिकेगी जो AI टूल्स का प्रभावी उपयोग करके अपनी उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) को कम से कम 40% तक बढ़ा सकते हैं। यानी अब काम करने का तरीका बदल रहा है और सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता भी उतनी ही जरूरी हो गई है।इसी तरह ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, वर्ष 2030 तक दुनिया भर में करीब 22% नौकरियां सीधे तौर पर AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। इसका मतलब है कि कई पारंपरिक भूमिकाएं या तो बदल जाएंगी या पूरी तरह खत्म हो सकती हैं, जबकि नई टेक-आधारित नौकरियों का तेजी से विस्तार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के दौर में सबसे बड़ी चुनौती स्किल अपग्रेडेशन की है। छात्रों और युवाओं को अब अपने कोर्स के साथ-साथ AI, डेटा एनालिटिक्स, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स की ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना होगा, ताकि वे बदलते रोजगार बाजार में खुद को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकें।कुल मिलाकर, AI ने जहां एक ओर काम करने के तरीकों को आसान और तेज बनाया है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक शिक्षा और रोजगार प्रणाली के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी कर रहा है। आने वाले वर्षों में वही उम्मीदवार आगे रहेंगे जो तकनीक के साथ खुद को तेजी से ढालने में सक्षम होंगे।