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भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह बना 'मेगा पोर्ट': केंद्र ने अदाणी के मुंद्रा पोर्ट को दी नई पहचान, इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार

 

अदाणी ग्रुप के मुंद्रा पोर्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने पहली बार देश के चार बंदरगाहों को ‘मेगा पोर्ट’ के तौर पर अधिसूचित किया है। खास बात यह है कि इन चार बंदरगाहों में मुंद्रा पोर्ट भी शामिल है और यह सूची में शामिल निजी क्षेत्र का बंदरगाह है।

सरकार की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना में चार बंदरगाहों को मेगा पोर्ट घोषित किया गया है। इनमें दीनदयाल पोर्ट (कांडला), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (न्हावा शेवा), पारादीप पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट शामिल हैं। यह अधिसूचना इंडियन पोर्ट्स एक्ट, 2025 की धारा 73 के तहत जारी की गई है।

किन बंदरगाहों को मिल सकता है मेगा पोर्ट का दर्जा?

मेगा पोर्ट का दर्जा देने के लिए सरकार ने बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता को आधार बनाया है। इसके तहत बल्क कार्गो पोर्ट के लिए एक निर्धारित वार्षिक कार्गो क्षमता और कंटेनर पोर्ट के लिए निर्धारित TEU क्षमता जैसे मानक तय किए गए हैं।

नए नियमों के तहत जो बंदरगाह निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं, उन्हें इस विशेष श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। सरकार की अधिसूचना के बाद इन चार बंदरगाहों को आधिकारिक तौर पर मेगा पोर्ट के रूप में नोटिफाई किया गया है।

5 साल तक रहेगा यह दर्जा

25 सितंबर को जारी अधिसूचना के बाद यह व्यवस्था प्रभावी हो गई है। मेगा पोर्ट के रूप में इन बंदरगाहों का विशेष दर्जा पांच साल की अवधि के लिए रहेगा।

सरकार के इस कदम को देश के बंदरगाह और समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। बड़े बंदरगाहों की क्षमता बढ़ने से भारत के आयात-निर्यात कारोबार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मुंद्रा पोर्ट क्यों है खास?

गुजरात के कच्छ में स्थित मुंद्रा पोर्ट भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है। अदाणी पोर्ट्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह गहरे पानी वाला और ऑल-वेदर पोर्ट है, जो उत्तर और पश्चिम भारत के बड़े व्यापारिक इलाकों को समुद्री मार्ग से जोड़ता है।

मुंद्रा पोर्ट पर अलग-अलग तरह के कार्गो को संभालने की सुविधा है। यहां कंटेनर, ड्राई बल्क, लिक्विड कार्गो, क्रूड ऑयल, LNG, LPG और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट कार्गो को भी हैंडल किया जाता है। पोर्ट के पास गहरे पानी की सुविधा होने की वजह से बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता भी है।

मुंद्रा की एक और बड़ी खासियत इसका कोयला आयात टर्मिनल है। अदाणी पोर्ट्स इसे भारत का सबसे बड़ा कोयला आयात टर्मिनल बताता है। इसके अलावा पोर्ट की सड़क, रेल, कन्वेयर और अन्य मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के जरिए कार्गो को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता है।

यानी अब जब सरकार ने मुंद्रा समेत चार बंदरगाहों को ‘मेगा पोर्ट’ का दर्जा दिया है, तो देश के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यह एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन बंदरगाहों की क्षमता, कनेक्टिविटी और कार्गो हैंडलिंग भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।