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EV क्रांति पर लग सकती है ब्रेक! चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हुआ, पर मेंटेनेंस की अनदेखी बनेगी सबसे बड़ा रोड़ा

 

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ देशभर में EV चार्जिंग नेटवर्क भी लगातार विस्तार कर रहा है. अब हाईवे और बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक कार के लिए चार्जिंग स्टेशन आसानी से मिल जाते हैं. ज्यादातर कंपनियों के ऐप पर इनकी लोकेशन और उपलब्धता की जानकारी भी दिखाई देती है.

लेकिन असली समस्या तब सामने आती है, जब आप चार्जिंग स्टेशन तक पहुंचते हैं और वहां लगा चार्जर काम नहीं करता. कहीं चार्जर ऑफलाइन मिलता है, तो कहीं चार्जिंग गन में खराबी होती है. कुछ जगहों पर स्टेशन तो मौजूद होता है, लेकिन उसे चलाने या उसकी स्थिति के बारे में स्थानीय स्टाफ को ही पूरी जानकारी नहीं होती.

हाल ही में MG ZS EV से भुज से दिल्ली तक करीब 1,200 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऐसा ही अनुभव सामने आया. इस सफर ने यह साफ कर दिया कि EV से लंबी दूरी की यात्रा अब संभव जरूर है, लेकिन सिर्फ कार की रेंज पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है. आपको चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन के साथ-साथ उसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी रखना भी जरूरी है.

भुज से जोधपुर तक चार्जिंग बनी सबसे बड़ी चुनौती

यह सफर भुज से जोधपुर, फिर जोधपुर से जयपुर और आखिर में जयपुर से दिल्ली तक किया गया. MG ZS EV ने इस दौरान करीब 380 किलोमीटर की रियल-वर्ल्ड रेंज दी.

भुज से जोधपुर के बीच रास्ते में सबसे ज्यादा Hindustan Petroleum यानी HP के चार्जिंग स्टेशन दिखाई दिए. इनकी लोकेशन MG e-Hub ऐप पर भी उपलब्ध थी.

शुरुआत में यह देखकर राहत मिली कि लगभग हर 40-50 किलोमीटर के अंतराल पर चार्जिंग स्टेशन दिखाई दे रहे थे. इससे लगा कि EV से लंबी यात्रा के दौरान चार्जिंग की समस्या अब काफी हद तक दूर हो गई है.

लेकिन चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल शुरू करने के बाद तस्वीर कुछ अलग नजर आई.

10 में से करीब 6 चार्जर किसी न किसी परेशानी में मिले

यात्रा के दौरान मिले करीब 10 चार्जिंग स्टेशनों में से लगभग 6 ऐसे थे, जहां किसी न किसी तरह की परेशानी सामने आई. कुछ चार्जर ऑफलाइन थे, कुछ की चार्जिंग गन काम नहीं कर रही थी और कुछ में तकनीकी खराबी दिखाई दी.

EV यात्रा में ऐसी स्थिति काफी मुश्किल पैदा कर सकती है. क्योंकि ऐप पर चार्जर उपलब्ध दिखाई देता है और ड्राइवर उसी भरोसे पर वहां तक पहुंचता है. लेकिन वहां पहुंचने के बाद अगर चार्जर बंद मिले तो अगले स्टेशन तक पहुंचने के लिए बैटरी और दूरी का दोबारा हिसाब लगाना पड़ता है.

इससे समय तो खराब होता ही है, साथ ही ड्राइवर की रेंज एंग्जायटी भी बढ़ जाती है.

पेट्रोल पंप पर चार्जर, लेकिन स्टाफ को ही जानकारी नहीं

इस सफर के दौरान एक और बड़ी समस्या सामने आई. कुछ HP पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग स्टेशन मौजूद थे, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारियों को चार्जर की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी.

कुछ जगहों पर चार्जर को ऑपरेट करने की प्रक्रिया को लेकर भी स्टाफ ज्यादा परिचित नहीं था. ऐसे में पहली बार लंबी दूरी की यात्रा कर रहे EV मालिक के लिए परेशानी और बढ़ सकती है.

कस्टमर सपोर्ट को लेकर भी हर जगह अनुभव अच्छा नहीं रहा. कुछ चार्जिंग स्टेशनों पर मदद के लिए दिए गए नंबरों से समय पर प्रतिक्रिया नहीं मिली.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ हाईवे पर चार्जर लगा देना ही पर्याप्त है? या फिर उसके साथ 24x7 ऑपरेशन, नियमित मेंटेनेंस, प्रशिक्षित स्टाफ और तेज कस्टमर सपोर्ट भी जरूरी है?

जोधपुर पहुंचने के बाद बेहतर हुआ अनुभव

भुज से जोधपुर तक परेशानी के बाद चार्जिंग का अनुभव काफी बेहतर रहा. जोधपुर में Tata Power, Statiq और Jio-bp के चार्जिंग नेटवर्क उपयोगी साबित हुए.

यहां करीब 50 से 80 kW तक के फास्ट चार्जर उपलब्ध मिले और वे ठीक तरीके से काम कर रहे थे. जोधपुर से जयपुर के बीच भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दिया.

इस हिस्से में MG ZS EV की रेंज ने भी अच्छी मदद की. कार एक ही चार्ज में जोधपुर से जयपुर पहुंच गई, इसलिए रास्ते में चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ी.

जयपुर से दिल्ली के बीच भी ज्यादातर सफर आसान

जयपुर से दिल्ली के सफर में भी चार्जिंग को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं आई. हालांकि मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक Indian Oil e-Charger में तकनीकी खराबी देखने को मिली.

दूसरी तरफ Tata Power के फास्ट चार्जर्स काम करते मिले और उन्होंने सफर को काफी आसान बनाया.

इससे एक बात साफ होती है कि चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता के साथ उसकी विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

EV चार्जिंग नेटवर्क की असली चुनौती क्या है?

भारत में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है. लंबी दूरी के हाईवे पर अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा चार्जिंग विकल्प उपलब्ध हैं.

लेकिन मौजूदा चुनौती केवल चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की नहीं है. सबसे जरूरी बात यह है कि जो चार्जर लगाए जा चुके हैं, वे जरूरत के समय चालू और इस्तेमाल के लिए तैयार रहें.

EV यूजर के लिए चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन जानना पर्याप्त नहीं है. उसे यह भी पता होना चाहिए कि चार्जर वास्तव में काम कर रहा है या नहीं, चार्जिंग गन उपलब्ध है या नहीं और जरूरत पड़ने पर सहायता मिलेगी या नहीं.

EV से लंबी यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप इलेक्ट्रिक कार से लंबी दूरी की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो केवल एक ऐप पर निर्भर रहने के बजाय रास्ते में मौजूद कई चार्जिंग विकल्पों की जानकारी रखना बेहतर है.

  • यात्रा शुरू करने से पहले चार्जिंग स्टेशनों की पूरी प्लानिंग करें.
  • प्रमुख स्टॉप पर वैकल्पिक चार्जर जरूर देखें.
  • केवल ऐप पर दिख रही उपलब्धता पर पूरी तरह निर्भर न रहें.
  • लंबी दूरी के सफर में पर्याप्त बैटरी रिजर्व रखें.
  • हाईवे पर फास्ट चार्जर की उपलब्धता पहले से जांच लें.
  • जहां संभव हो, चार्जिंग स्टेशन की हालिया स्थिति या यूजर अपडेट जरूर देखें.

सिर्फ ज्यादा चार्जर नहीं, भरोसेमंद चार्जर चाहिए

करीब 1,200 किलोमीटर की इस यात्रा से यह साफ होता है कि भारत में EV लेकर लंबी दूरी तय करना अब पहले जैसा मुश्किल नहीं है. चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार हुआ है और कई जगहों पर अच्छी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.

लेकिन EV को वास्तव में लंबी दूरी के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए केवल नए चार्जिंग स्टेशन लगाना पर्याप्त नहीं होगा. मेंटेनेंस, अपटाइम, प्रशिक्षित स्टाफ और भरोसेमंद कस्टमर सपोर्ट पर भी उतना ही ध्यान देना होगा.

आखिरकार EV यूजर को सिर्फ यह भरोसा नहीं चाहिए कि अगले 50 किलोमीटर में एक चार्जर मौजूद है. उसे यह भरोसा चाहिए कि जब वह वहां पहुंचेगा, तब वह चार्जर काम भी कर रहा होगा.