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JCB Business Idea: कितने में आती है JCB मशीन, कितनी बनेगी EMI और हर महीने होगी कितने लाख की कमाई?

 

आज के दौर में बुलडोजर और दूसरी कंस्ट्रक्शन मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सड़क निर्माण से लेकर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स और भारी सामान की हैंडलिंग तक, इन मशीनों की जरूरत लगभग हर बड़े कंस्ट्रक्शन साइट पर होती है। भारत में JCB और Mahindra जैसी कंपनियां कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कई तरह की मशीनें बेचती हैं।

अगर आप भी JCB खरीदकर इसे किराये पर चलाने का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए कमाई का एक विकल्प हो सकता है। लेकिन मशीन खरीदने के लिए कितने पैसे चाहिए, कितनी EMI देनी होगी और महीने में कितनी कमाई हो सकती है? आइए पूरा हिसाब समझते हैं।

32 लाख की JCB पर कितनी EMI?

JCB जैसी मशीनें आमतौर पर कंस्ट्रक्शन कंपनियों, ठेकेदारों और रेंटल बिजनेस से जुड़े लोग खरीदते हैं। मशीन खरीदने के लिए बैंक से लोन लेने का विकल्प भी मौजूद होता है। हालांकि, लोन की राशि और ब्याज दर ग्राहक की प्रोफाइल, क्रेडिट स्कोर और बैंक की शर्तों पर निर्भर करती है।

दिल्ली में एक JCB बुलडोजर की कीमत करीब 32 से 38 लाख रुपये के बीच बताई जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर आप 32 लाख रुपये की मशीन खरीदते हैं और बैंक 90 प्रतिशत तक फाइनेंस करता है, तो आपको करीब 28.80 लाख रुपये का लोन मिल सकता है।

इस स्थिति में करीब 10 प्रतिशत यानी 3.20 लाख रुपये आपको डाउन पेमेंट के तौर पर देने होंगे।

मान लीजिए बैंक इस लोन पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज लेता है, तो अलग-अलग अवधि पर आपकी अनुमानित EMI कुछ इस तरह हो सकती है:

  • 5 साल का लोन: करीब 59,784 रुपये प्रति महीना
  • 6 साल का लोन: करीब 51,914 रुपये प्रति महीना
  • 7 साल का लोन: करीब 46,337 रुपये प्रति महीना

ध्यान रखें कि ये एक उदाहरण के आधार पर अनुमानित आंकड़े हैं। वास्तविक EMI बैंक की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन राशि और आपकी क्रेडिट प्रोफाइल के हिसाब से अलग हो सकती है।

JCB से कैसे होगी कमाई?

JCB खरीदने के बाद इसे कंस्ट्रक्शन कंपनियों या ठेकेदारों को किराये पर देकर कमाई की जा सकती है। आमतौर पर ऐसी मशीनों का किराया उनके रनिंग टाइम यानी प्रति घंटे के हिसाब से तय किया जाता है।

मशीन के इस्तेमाल और स्थानीय बाजार के अनुसार JCB से करीब 1,000 से 1,500 रुपये प्रति घंटे तक का किराया मिलने का अनुमान लगाया जाता है।

अब अगर एक उदाहरण के तौर पर मानें कि आपकी मशीन रोजाना 8 घंटे चलती है और महीने में 22 दिन काम करती है, तो कुल रनिंग होगी:

8 घंटे × 22 दिन = 176 घंटे

अगर आपको औसतन 1,500 रुपये प्रति घंटे मिलते हैं, तो:

176 × ₹1,500 = ₹2.64 लाख

यानी इस हिसाब से मशीन से महीने में करीब 2.64 लाख रुपये की ग्रॉस कमाई हो सकती है।

खर्च निकालने के बाद कितनी बचेगी कमाई?

यह पूरी रकम आपका मुनाफा नहीं है। मशीन चलाने में डीजल, ऑपरेटर की सैलरी, सर्विसिंग, मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और अन्य खर्च भी होते हैं।

अगर उदाहरण के तौर पर इन सभी खर्चों को मिलाकर करीब 1.5 लाख रुपये प्रति महीने मान लिया जाए, तो:

₹2.64 लाख - ₹1.50 लाख = ₹1.14 लाख

यानी इस अनुमान के मुताबिक मशीन से करीब 1 लाख रुपये से ज्यादा मासिक ऑपरेटिंग इनकम बच सकती है।

हालांकि, अगर मशीन की EMI भी इसी खर्च में जोड़ दी जाए तो वास्तविक हाथ में बचने वाली रकम कम होगी। इसके अलावा मशीन को हर महीने कितने घंटे काम मिलता है, किराये की स्थानीय दर क्या है और डीजल व मेंटेनेंस पर कितना खर्च आता है, इन सभी चीजों का सीधा असर मुनाफे पर पड़ेगा।

खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

JCB को रेंटल बिजनेस के तौर पर खरीदने से पहले सिर्फ प्रति घंटे की कमाई देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। मशीन की EMI, डाउन पेमेंट, डीजल, ऑपरेटर, मेंटेनेंस, बीमा और काम मिलने की नियमितता का पूरा हिसाब लगाना जरूरी है।

अगर मशीन को लगातार पर्याप्त काम मिलता है, तो यह बिजनेस अच्छा कैश फ्लो दे सकता है। वहीं, मशीन लंबे समय तक खाली रहने पर EMI और दूसरे फिक्स्ड खर्च आपकी कमाई पर भारी पड़ सकते हैं।

इसलिए JCB खरीदने से पहले अपने इलाके में रेंटल रेट, कंस्ट्रक्शन कंपनियों से मिलने वाले काम और मशीन के रखरखाव की लागत की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।