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पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी चर्चा: भारत में रोज कितना पेट्रोल-डीजल खपता है, वाहनों में कितना होता है इस्तेमाल?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का “बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल” करने की अपील के बाद देशभर में ईंधन खपत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि भारत में आखिर रोज कितना पेट्रोल और डीजल इस्तेमाल होता है और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा किस सेक्टर का है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत सीधे अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर डालती है।

वाहनों में सबसे ज्यादा होता है ईंधन का इस्तेमाल

देश में पेट्रोल और डीजल की सबसे अधिक खपत परिवहन क्षेत्र में होती है। कार, बाइक, बस, ट्रक, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहन बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च करते हैं। खासतौर पर डीजल का उपयोग माल परिवहन और भारी वाहनों में सबसे ज्यादा होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • पेट्रोल का सबसे बड़ा उपयोग दोपहिया और निजी कारों में होता है।
  • डीजल का बड़ा हिस्सा ट्रकों, बसों, कृषि उपकरणों और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है।

भारत में रोज कितना तेल खपता है?

भारत में प्रतिदिन करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। अनुमान के अनुसार:

  • देश में रोजाना लगभग 1 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल की खपत होती है।
  • इसमें पेट्रोल और डीजल का बड़ा हिस्सा सड़क परिवहन में उपयोग होता है।
  • भारत में हर दिन लाखों वाहन सड़कों पर चलते हैं, जिससे ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है।

क्यों अहम है ईंधन बचत?

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की बचत न केवल आर्थिक रूप से जरूरी है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

सरकार क्यों दे रही है ईंधन बचाने पर जोर?

हाल के समय में वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में सरकार लोगों को सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और जरूरत पड़ने पर ही वाहन इस्तेमाल करने की सलाह दे रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद कई राज्य सरकारें भी “नो व्हीकल डे”, वर्क फ्रॉम होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने जैसे कदमों पर जोर दे रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग ईंधन की बचत को आदत बना लें, तो इससे देश के आयात बिल में कमी आने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी बड़ी मदद मिल सकती है।