CNG vs Hybrid Car: ज्यादा माइलेज के साथ किसमें होगी ज्यादा बचत? खरीदने से पहले समझें पूरा गणित
भारत में कार खरीदते समय माइलेज अब सबसे अहम फैक्टर्स में शामिल हो गया है। खासकर रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोग ऐसी कार पसंद करते हैं, जिसका फ्यूल खर्च कम हो। यही वजह है कि पेट्रोल और डीजल के अलावा CNG और Strong Hybrid Cars की मांग भी बढ़ी है।
सीएनजी कारें कम रनिंग कॉस्ट के लिए जानी जाती हैं, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से बेहतर माइलेज देने की कोशिश करती हैं। हालांकि, सिर्फ माइलेज देखकर यह तय करना सही नहीं होगा कि कौन सी कार ज्यादा पैसे बचाएगी। कार की शुरुआती कीमत, मेंटेनेंस, बूट स्पेस और भविष्य के खर्च को भी गणना में शामिल करना जरूरी है।
CNG कार में कितना आता है प्रति किलोमीटर खर्च?
सीएनजी कारों का माइलेज आमतौर पर पेट्रोल मॉडल की तुलना में बेहतर होता है। कई सीएनजी कारें परिस्थितियों और ड्राइविंग स्टाइल के आधार पर करीब 26 से 32 किमी प्रति किलो तक का माइलेज दे सकती हैं।
इस वजह से सीएनजी पर प्रति किलोमीटर खर्च करीब 2.8 से 3.2 रुपये के आसपास बैठ सकता है। जिन लोगों की रोजाना रनिंग ज्यादा है, उनके लिए यह अंतर महीने के फ्यूल बजट पर साफ दिखाई दे सकता है।
Hybrid Car का रनिंग खर्च कितना है?
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। शहर में बार-बार रुकने और चलने की स्थिति में हाइब्रिड सिस्टम इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से फ्यूल बचाने में मदद करता है।
ऐसी कारों का वास्तविक माइलेज मॉडल और ड्राइविंग कंडीशन के हिसाब से अलग हो सकता है, लेकिन करीब 25 से 28 किमी प्रति लीटर का माइलेज मिलने पर पेट्रोल की कीमत के आधार पर रनिंग कॉस्ट लगभग 3.8 से 4.2 रुपये प्रति किलोमीटर के आसपास हो सकती है।
यानी समान परिस्थितियों में सीएनजी कार की फ्यूल रनिंग कॉस्ट कम रह सकती है।
खरीदते समय कीमत का भी रखें ध्यान
सिर्फ फ्यूल खर्च ही पूरी कहानी नहीं है। सीएनजी कार खरीदते समय पेट्रोल वेरिएंट की तुलना में शुरुआती कीमत आमतौर पर ज्यादा होती है। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल की कीमत पेट्रोल वेरिएंट से काफी अधिक हो सकती है।
अगर किसी व्यक्ति की रोजाना रनिंग 80 से 100 किलोमीटर तक है तो सीएनजी में फ्यूल बचत के जरिए अतिरिक्त खरीद कीमत अपेक्षाकृत जल्दी रिकवर हो सकती है। दूसरी ओर हाइब्रिड कार की ज्यादा शुरुआती कीमत को केवल फ्यूल बचत से रिकवर करने में ज्यादा समय लग सकता है।
हालांकि, वास्तविक अवधि कार के मॉडल, ईंधन की कीमत, माइलेज और सालाना रनिंग पर निर्भर करेगी।
CNG और Hybrid में ड्राइविंग का फर्क
दोनों तकनीकों का ड्राइविंग अनुभव भी अलग है। सीएनजी कार में सिलेंडर के लिए जगह होने के कारण कुछ मॉडलों में बूट स्पेस प्रभावित होता है। वहीं हाइब्रिड कारों में आमतौर पर बूट स्पेस को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि यह मॉडल के डिजाइन पर निर्भर करता है।
हाइब्रिड कार का एक बड़ा फायदा इसका स्मूथ ऑटोमैटिक ड्राइविंग अनुभव है। ट्रैफिक में बार-बार क्लच और गियर बदलने की जरूरत नहीं होती। दूसरी तरफ सीएनजी कारों में मॉडल के अनुसार मैनुअल या ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिल सकता है।
Maintenance और भविष्य के खर्च को न भूलें
सीएनजी कार में सिलेंडर और सीएनजी सिस्टम से जुड़े निर्धारित निरीक्षण और मेंटेनेंस का ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा समय के साथ सामान्य सर्विसिंग का खर्च भी आता है।
हाइब्रिड कारों में भी नियमित सर्विसिंग जरूरी है। इनके हाई-वोल्टेज बैटरी सिस्टम की लंबी अवधि की विश्वसनीयता आमतौर पर अच्छी हो सकती है, लेकिन वारंटी अवधि के बाद बैटरी से जुड़ा बड़ा खर्च संभावित रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए खरीदने से पहले बैटरी वारंटी और रिप्लेसमेंट से जुड़ी शर्तों को जरूर देखना चाहिए।
किसके लिए CNG और किसके लिए Hybrid?
अगर आपकी प्राथमिकता कम से कम रनिंग कॉस्ट है और कार रोजाना लंबी दूरी तय करती है तो सीएनजी एक व्यावहारिक विकल्प हो सकती है। खासकर ऐसे लोगों के लिए जिनके रूट पर सीएनजी स्टेशन आसानी से उपलब्ध हैं।
वहीं अगर आप ज्यादा शुरुआती बजट खर्च कर सकते हैं और ऑटोमैटिक, शांत और स्मूथ ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं तो स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार पर विचार किया जा सकता है।
इसलिए अंतिम फैसला केवल माइलेज देखकर नहीं बल्कि खरीद कीमत + ईंधन खर्च + सालाना किलोमीटर + मेंटेनेंस + आपकी ड्राइविंग जरूरत को जोड़कर करना ज्यादा सही रहेगा।