कार में आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने से पहले सावधान! फायदे से ज्यादा हो सकते हैं नुकसान, जानें पूरी बात
आजकल कार खरीदते समय ग्राहक सिर्फ माइलेज और कीमत नहीं देखते। फीचर्स भी खरीदारी के फैसले में बड़ी भूमिका निभाते हैं और इनमें सनरूफ सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फीचर्स में शामिल है। यही वजह है कि कई लोग कंपनी से सनरूफ वाली कार खरीदने के बजाय अपनी पुरानी या बिना सनरूफ वाली कार में आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने का विकल्प चुनते हैं।हालांकि, कार की छत को काटकर सनरूफ लगवाना सिर्फ एक कॉस्मेटिक बदलाव नहीं है। इससे कार की संरचना, वारंटी, इंश्योरेंस और रीसेल वैल्यू पर असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसा कराने से पहले इन संभावित नुकसानों को समझना जरूरी है।
1. कार की स्ट्रक्चरल मजबूती प्रभावित हो सकती है
कार की छत वाहन के बॉडी स्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। आफ्टरमार्केट सनरूफ लगाने के लिए छत में कटिंग करनी पड़ती है। गलत तरीके से की गई कटिंग या कमजोर फिटिंग से वाहन की मूल संरचना प्रभावित हो सकती है।
खासकर किसी गंभीर दुर्घटना या कार के पलटने की स्थिति में छत की मजबूती महत्वपूर्ण होती है। फैक्ट्री-फिटेड सनरूफ वाली कारों में निर्माता डिजाइन के स्तर पर बॉडी स्ट्रक्चर और सुरक्षा को ध्यान में रखता है, जबकि लोकल मॉडिफिकेशन में वही इंजीनियरिंग और टेस्टिंग मिलना जरूरी नहीं है।
2. बारिश में हो सकती है पानी की लीकेज
आफ्टरमार्केट सनरूफ में सबसे आम परेशानियों में से एक वॉटर लीकेज हो सकती है। अगर सीलिंग सही तरीके से नहीं की गई या इस्तेमाल की गई रबर और सीलेंट की गुणवत्ता खराब है, तो बारिश या कार वॉश के दौरान पानी केबिन में पहुंच सकता है।
इससे रूफ लाइनिंग, सीट और दूसरे इंटीरियर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। लंबे समय तक नमी रहने पर बदबू और जंग जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
3. वायरिंग से छेड़छाड़ का जोखिम
इलेक्ट्रिक सनरूफ लगाने के दौरान कार की मौजूदा वायरिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। अगर वायरिंग गलत तरीके से की गई तो शॉर्ट सर्किट, इलेक्ट्रिकल फॉल्ट या अन्य परेशानियां सामने आ सकती हैं।
इसलिए सिर्फ कम कीमत देखकर किसी लोकल दुकान से ऐसा मॉडिफिकेशन करवाना जोखिम भरा हो सकता है।
4. वारंटी और इंश्योरेंस पर पड़ सकता है असर
कार में कंपनी द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया स्ट्रक्चरल या इलेक्ट्रिकल मॉडिफिकेशन निर्माता की वारंटी की शर्तों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर वाहन और वारंटी की शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
इसी तरह इंश्योरेंस पॉलिसी में भी वाहन के मॉडिफिकेशन की जानकारी देना जरूरी हो सकता है। दुर्घटना की स्थिति में क्लेम पर विवाद से बचने के लिए किसी भी बड़े मॉडिफिकेशन से पहले अपनी इंश्योरेंस कंपनी और अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमों की पुष्टि करना बेहतर है।
5. रीसेल वैल्यू हो सकती है कम
आफ्टरमार्केट सनरूफ वाली कार को बेचते समय भी परेशानी आ सकती है। सेकेंड-हैंड कार खरीदने वाले लोग अक्सर ऐसे मॉडिफिकेशन को लेकर सतर्क रहते हैं, खासकर जब कार की छत में कटिंग की गई हो।
खरीदार को लीकेज, स्ट्रक्चरल मजबूती और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की चिंता हो सकती है। इसका असर कार की रीसेल वैल्यू पर पड़ सकता है।
6. गर्मी और माइलेज पर भी असर संभव
हर आफ्टरमार्केट ग्लास सनरूफ में फैक्ट्री-फिटेड सनरूफ जैसी इंसुलेशन और UV प्रोटेक्शन मिलना जरूरी नहीं है। खराब क्वालिटी का ग्लास इस्तेमाल होने पर तेज धूप में केबिन ज्यादा गर्म हो सकता है।
ऐसे में एयर कंडीशनिंग सिस्टम को केबिन ठंडा करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। परिस्थितियों के आधार पर इससे ईंधन या ऊर्जा खपत पर भी असर पड़ सकता है।
कंपनी फिटेड सनरूफ क्यों बेहतर विकल्प है?
अगर सनरूफ आपके लिए जरूरी फीचर है, तो संभव हो तो फैक्ट्री-फिटेड सनरूफ वाली कार लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। कंपनी डिजाइन, बॉडी स्ट्रक्चर, सीलिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सुरक्षा को वाहन के निर्माण के दौरान ही एक साथ विकसित करती है।आफ्टरमार्केट सनरूफ भले ही कार का लुक और फीचर्स बेहतर कर दे, लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए कार की मूल संरचना में बदलाव करना लंबे समय में महंगा पड़ सकता है।