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कल विश्वकर्मा पूजा पर भद्रा का साया रहेगा या नहीं? जानें खरीदारी का सबसे शुभ मुहूर्त
 

 

विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है। इस दिन खासतौर पर कारखानों, वर्कशॉप, गैराज, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा के दिन कई लोग नए वाहन, मशीन या काम से जुड़ी दूसरी चीजों की खरीदारी भी करते हैं। ऐसे में शुभ मुहूर्त और भद्रा को लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार विश्वकर्मा पूजा के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। हालांकि, राहुकाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 17 सितंबर को राहुकाल दोपहर 3:18 बजे से शाम 4:52 बजे तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य और खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन खरीदारी के लिए सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग भी बताया गया है। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार ये योग सुबह 4:30 बजे से शाम 4:23 बजे तक रहेंगे। इस अवधि को खरीदारी के लिए शुभ माना गया है। इसके अलावा शाम को रात 7:59 बजे से 8:23 बजे तक भी खरीदारी का एक शुभ समय बताया गया है।

वहीं पूजा के शुभ समय को लेकर अलग-अलग पंचांगों में स्थानीय गणना के कारण थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। एक प्रकाशित पंचांग के अनुसार 17 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। दूसरे स्रोत में पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय बताया गया है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना अधिक उचित रहेगा।

विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले कार्यस्थल, मशीनों और औजारों की अच्छी तरह सफाई करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है। मशीनों और उपकरणों को भी पूजा में शामिल किया जाता है। कई जगह इस दिन मशीनों का इस्तेमाल न करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में उन्नति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है। खासतौर पर इंजीनियर, कारीगर, शिल्पकार, फैक्ट्री संचालक, वाहन व्यवसाय से जुड़े लोग और तकनीकी क्षेत्र के कर्मचारी इस दिन विशेष पूजा करते हैं।

इस तरह 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन भद्रा का साया नहीं रहने की बात कही गई है, लेकिन खरीदारी या किसी शुभ कार्य के लिए राहुकाल से बचने की सलाह दी गई है। मुहूर्त शहर और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अंतिम समय अपने स्थानीय पंचांग से जरूर मिलान कर लें।