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मृत्यु के बाद शव को जमीन पर क्यों लिटाया जाता है? गरुड़ पुराण से जानें इसके पीछे का कारण
 

 

हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद कई तरह के रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। इन्हीं में एक परंपरा है मृत व्यक्ति के शरीर को बिस्तर से उतारकर जमीन पर लिटाना। आपने भी देखा होगा कि घर में किसी की मृत्यु होने पर शव को चारपाई या बिस्तर पर रखने के बजाय जमीन पर रखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं क्या हैं और गरुड़ पुराण में इस बारे में क्या बताया गया है?

गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद किए जाने वाले संस्कारों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसके प्रेतकल्प और मृत्यु संस्कार से जुड़े प्रसंगों में मृतक के शरीर को जमीन पर रखने की परंपरा का उल्लेख मिलता है।

गरुड़ पुराण में क्या बताया गया है?

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में बताया गया है कि मृत्यु के करीब पहुंचे व्यक्ति को शुद्ध की गई जमीन पर कुश या दर्भ घास बिछाकर लिटाना चाहिए। कुछ पाठों में जमीन को गोबर से लीपकर पवित्र करने और उसके ऊपर दर्भ घास बिछाने का विधान बताया गया है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है और मृत्यु के समय किए जाने वाले धार्मिक संस्कार पूरे होते हैं।

पंचतत्व में विलीन होने का प्रतीक

हिंदू धर्म दर्शन के अनुसार मानव शरीर पांच तत्वों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। मृत्यु के बाद शरीर का इन पंचतत्वों में विलीन होना माना जाता है। जमीन पर शव को रखने की परंपरा को भी कुछ धार्मिक व्याख्याओं में पृथ्वी तत्व से जुड़ने और प्रकृति की ओर लौटने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

कुश और दर्भ घास का क्यों है महत्व?

गरुड़ पुराण में कुश और दर्भ घास को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना गया है। मृत्यु के समय इसके उपयोग का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि दर्भ घास पर व्यक्ति को लिटाना शुभ और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी होता है। इसके साथ ही मृतक के पास तुलसी दल, तिल और अन्य धार्मिक वस्तुएं रखने की परंपरा भी अलग-अलग परिवारों में निभाई जाती है।

मृत्यु के बाद किए जाते हैं विशेष संस्कार

हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद शरीर को स्नान कराना, नए वस्त्र पहनाना, फूलों से सजाना और अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाना जैसे कई रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। इन सभी संस्कारों को मृतक के प्रति सम्मान और उसकी आत्मा की शांति की कामना से जोड़ा जाता है।

क्या हर जगह यही परंपरा है?

भारत में अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। कहीं शव को जमीन पर चटाई या कपड़ा बिछाकर रखा जाता है, तो कहीं अन्य पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं। इसलिए हर परिवार में एक जैसी विधि का पालन जरूरी नहीं है।

कुल मिलाकर, मृत्यु के बाद शव को जमीन पर लिटाने की परंपरा के पीछे गरुड़ पुराण में वर्णित धार्मिक विधान, कुश-दर्भ का महत्व और शरीर के पंचतत्व में लौटने की मान्यता जैसे विचार जुड़े हुए हैं। ये धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, इन्हें वैज्ञानिक तथ्य या सभी हिंदू समुदायों पर लागू एक समान नियम नहीं समझना चाहिए।