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जन्म लेते ही क्यों रोते हैं नवजात शिशु? गरुड़ पुराण में बताए गए आध्यात्मिक कारणों को जानें

 

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका रोना एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार जन्म के बाद जब शिशु पहली बार सांस लेता है, तो उसके फेफड़े सक्रिय होते हैं और शरीर नए वातावरण के अनुसार ढलने लगता है। यही कारण है कि नवजात का रोना उसके स्वस्थ होने का एक संकेत माना जाता है।

वहीं, गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक मान्यताओं में नवजात शिशु के रोने को आध्यात्मिक दृष्टि से भी समझाया गया है। इन ग्रंथों में जीवन, आत्मा और जन्म-मृत्यु के चक्र को लेकर कई गहरे विचार बताए गए हैं।

गर्भवास की पीड़ा और आत्मा की स्मृति

गरुड़ पुराण में वर्णित मान्यताओं के अनुसार आत्मा जन्म से पहले गर्भ में एक विशेष अवस्था से गुजरती है। गर्भवास को कठिन अनुभव बताया गया है, जहां जीव अपनी पूर्व अवस्थाओं और कर्मों से जुड़ी अनुभूतियों को महसूस करता है।

मान्यता है कि जन्म के समय जब आत्मा नए शरीर में प्रवेश करती है, तो उसे एक नए संसार में आना पड़ता है। इसी परिवर्तन को शिशु के रोने से जोड़ा जाता है।

सांसारिक माया में प्रवेश का संकेत

धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि जन्म के साथ ही जीव सांसारिक जीवन में प्रवेश करता है। गरुड़ पुराण में संसार को मोह-माया से जुड़ा हुआ बताया गया है। मान्यता है कि जन्म लेते समय आत्मा अपने पिछले ज्ञान को धीरे-धीरे भूलकर नए जीवन की यात्रा शुरू करती है।

इसी कारण शिशु का पहला रोना कुछ आध्यात्मिक व्याख्याओं में संसार में प्रवेश की प्रतिक्रिया माना जाता है।

आत्मा और शरीर का संबंध

हिंदू दर्शन के अनुसार आत्मा को अजर-अमर माना गया है, जबकि शरीर को नश्वर बताया गया है। जन्म को आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत माना जाता है। गरुड़ पुराण में कर्मों के आधार पर जीवन के अनुभवों का वर्णन मिलता है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि में अंतर

जहां आध्यात्मिक मान्यताएं नवजात के रोने को आत्मा की यात्रा और संसार में प्रवेश से जोड़ती हैं, वहीं विज्ञान के अनुसार बच्चे का रोना शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। जन्म के बाद सांस लेने, तापमान बदलने और बाहरी वातावरण से तालमेल बैठाने के कारण शिशु रोता है।

नोट: गरुड़ पुराण से जुड़ी ये बातें धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। विज्ञान नवजात के रोने को शारीरिक प्रक्रिया के रूप में समझाता है। दोनों दृष्टिकोण जीवन को समझने के अलग-अलग तरीके प्रस्तुत करते हैं।