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जब जिद पर अड़ीं पार्वती तो समझाने पहुंचे सप्तऋषि, जानिए शिव-पार्वती विवाह से जुड़ी पौराणिक कथा

 

फिल्म 'हनुमान अंश' का बुंदेली भजन इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो रहा है। भजन की एक पंक्ति "जब जिद पे आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि" रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए लोगों के बीच काफी चर्चित हो गई है। इस पंक्ति ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी सिर्फ भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम की नहीं, बल्कि माता पार्वती की कठोर तपस्या और उनकी अटूट आस्था से जुड़ी पौराणिक कथा भी है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। बचपन से ही माता पार्वती के मन में भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा थी। माना जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को अपना जीवनसाथी मान लिया था और उन्हें पाने के लिए कठिन साधना शुरू कर दी थी।

माता पार्वती की इस इच्छा को देखकर उनके माता-पिता भी चिंतित हो गए थे। भगवान शिव वैरागी स्वभाव के थे और संसारिक मोह-माया से दूर रहते थे। ऐसे में परिवार को चिंता थी कि शिव से विवाह का विचार पार्वती के लिए उचित होगा या नहीं। इसी कारण उन्हें समझाने का प्रयास किया गया।

कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब माता पार्वती अपने संकल्प से पीछे हटने को तैयार नहीं हुईं, तब सप्तऋषियों को उन्हें समझाने के लिए भेजा गया। सप्तऋषियों ने माता पार्वती को भगवान शिव के तपस्वी स्वरूप, उनके भस्म धारण करने और संसार से अलग रहने वाले स्वभाव के बारे में बताया। उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि शिव का जीवन सामान्य गृहस्थ जीवन से अलग है।

लेकिन माता पार्वती अपने निर्णय पर अडिग रहीं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ही उनके आराध्य हैं और वह अपनी तपस्या से उन्हें प्रसन्न करके ही रहेंगी। उनकी भक्ति और दृढ़ संकल्प देखकर अंत में सप्तऋषि भी उनकी निष्ठा से प्रभावित हुए।

इसके बाद माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया और दोनों का विवाह हुआ। हिंदू धर्म में शिव और पार्वती का संबंध प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

माना जाता है कि माता पार्वती की यह कथा केवल विवाह से जुड़ी घटना नहीं है, बल्कि यह दृढ़ इच्छाशक्ति और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश भी देती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भजन की यह पंक्ति इसी पौराणिक प्रसंग को नए अंदाज में लोगों तक पहुंचा रही है।