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सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है, इस दिन गजच्छाया योग, पितरों को करें विदा, 3 उपाय जरूर करें
 

 

पितृ पक्ष को सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन आने वाली अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से न हो पाया हो। साल 2026 में सर्व पितृ अमावस्या को लेकर भी श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता है।

कब है सर्व पितृ अमावस्या 2026?

पंचांग के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या आश्विन मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में पितृ पक्ष के समापन के साथ सर्व पितृ अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा है।

अमावस्या तिथि के आरंभ और समाप्त होने का समय अलग-अलग पंचांगों में स्थान के अनुसार कुछ अंतर के साथ दिया जा सकता है। इसलिए श्राद्ध या तर्पण के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार कुतुप और रोहिण आदि शुभ मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।

गजच्छाया योग का क्या है महत्व?

ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनने वाले कुछ योगों को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर गजच्छाया योग का उल्लेख भी किया जाता है। मान्यता है कि इस तरह के विशेष संयोग में पितरों के लिए किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व होता है।

हालांकि गजच्छाया योग की गणना सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए इसके बनने की पुष्टि स्थानीय पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर ही करनी चाहिए।

पितरों को इस दिन करें विदा

सर्व पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और तर्पण करके उन्हें विदाई देते हैं। मान्यता है कि पूरे पितृ पक्ष में जिन पितरों के लिए श्राद्ध नहीं किया जा सका, उनके लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है।

सुबह स्नान के बाद पितरों का स्मरण करके जल में काला तिल मिलाकर तर्पण करने की परंपरा है। इसके बाद जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।

सर्व पितृ अमावस्या पर जरूर करें ये 3 उपाय

1. तर्पण करें:
पितरों का स्मरण करके जल में काले तिल और कुश मिलाकर तर्पण करने की परंपरा है। इसे श्रद्धा और विधि के साथ करना चाहिए।

2. अन्न का दान करें:
इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, अनाज, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।

3. गाय और कौवे को भोजन कराएं:
पितृ पक्ष में गाय, कौवे और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा रही है। सर्व पितृ अमावस्या पर भी श्रद्धापूर्वक भोजन कराने की मान्यता है।

सर्व पितृ अमावस्या का मुख्य भाव अपने पूर्वजों को याद करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। तिथि, तर्पण और श्राद्ध की विधि में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए किसी भी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से सलाह लेना उचित रहेगा। ये धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक रूप से उपलब्ध नहीं है।