हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें व्रत की तारीख, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इस व्रत को रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए हरतालिका तीज का व्रत करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने की परंपरा है।
हरतालिका तीज 2026 में कब मनाई जाएगी?
पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। साल 2026 में हरतालिका तीज का व्रत शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन भगवान शिव की आराधना की थी। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी मान्यता के आधार पर महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है और पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं।
हरतालिका तीज पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
- भगवान शिव को बेलपत्र, जल, फूल और फल चढ़ाए जाते हैं।
- हरतालिका तीज की कथा सुनने और शिव-पार्वती मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व माना जाता है।
- शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है।
हरतालिका तीज पर रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करना चाहिए। इस दिन क्रोध, नकारात्मक विचारों और गलत व्यवहार से बचने की सलाह दी जाती है। महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
हालांकि, धार्मिक व्रत और परंपराएं आस्था पर आधारित होती हैं। इन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।