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नवरात्रि में बोए जौ का क्या करें? विसर्जन करते समय भूलकर भी ना करें ये गलती
 

 

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के दौरान कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा है। इन जौ को धार्मिक मान्यताओं में सुख-समृद्धि, शुभता और आने वाले समय के संकेत से जोड़कर देखा जाता है। नौ दिनों तक इनकी देखभाल की जाती है और दशहरा या नवरात्रि की समाप्ति पर पूजा के बाद इनका विसर्जन किया जाता है। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि नवरात्रि में बोए गए जौ का क्या करना चाहिए और इन्हें विसर्जित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

नवरात्रि में जौ बोने का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में जौ को समृद्धि, उन्नति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना के समय मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। नियमित रूप से जल अर्पित करके मां दुर्गा का स्मरण किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जौ का अंकुरित होना जीवन में विकास और शुभता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, जौ की लंबाई या रंग देखकर भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

नवरात्रि के बाद बोए गए जौ का क्या करें?

नवरात्रि समाप्त होने के बाद जौ को श्रद्धापूर्वक संभालकर पूजा की परंपरा के अनुसार विदा किया जा सकता है। इसके लिए कुछ तरीके अपनाए जाते हैं।

1. पूजा के बाद जौ का विसर्जन करें

दशहरा या पूजा के समापन पर मां दुर्गा को प्रणाम करके जौ को विसर्जित करने की परंपरा है। अपने क्षेत्र और परिवार की रीति के अनुसार इसका तरीका चुनें।

2. जौ को मिट्टी में लगा सकते हैं

यदि जौ में अंकुर निकल आए हैं, तो उन्हें किसी गमले या बगीचे की मिट्टी में लगाया जा सकता है। इससे पौधों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यह एक पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है।

3. पूजा स्थल की सामग्री का सम्मानपूर्वक निपटान करें

जौ के साथ रखी मिट्टी और अन्य प्राकृतिक पूजा सामग्री को साफ जगह पर मिट्टी में मिलाया जा सकता है। प्लास्टिक, पॉलिथीन या गैर-जैविक सामग्री को जल या मिट्टी में न डालें।

जौ का विसर्जन करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

जौ को कूड़े में न फेंकें: धार्मिक आस्था के कारण कई लोग जौ को पूजनीय मानते हैं। इसलिए उन्हें सामान्य कचरे में डालने के बजाय सम्मानपूर्वक मिट्टी में लगाना या परंपरा के अनुसार विसर्जित करना बेहतर है।

नदियों और तालाबों को प्रदूषित न करें: पूजा सामग्री को प्लास्टिक या अन्य कचरे के साथ जल स्रोतों में न डालें। यदि विसर्जन की परंपरा निभानी हो, तो स्थानीय नियमों का पालन करें और प्राकृतिक जल स्रोतों को साफ रखें।

जौ को लेकर डर या अंधविश्वास में न पड़ें: जौ का छोटा या बड़ा होना, पीला पड़ना अथवा सूखना कई बार पानी, धूप, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करता है। इन्हें देखकर अपने भविष्य को लेकर डरने की जरूरत नहीं है।

पूजा सामग्री को इधर-उधर न छोड़ें: विसर्जन के बाद बची सामग्री को सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या सीढ़ियों पर न छोड़ें। उसे उचित तरीके से संभालें।

क्या नवरात्रि के जौ घर में रख सकते हैं?

हां, यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में ऐसा किया जाता है, तो पूजा के बाद कुछ जौ को श्रद्धा के प्रतीक के रूप में रखा जा सकता है। कुछ लोग इन्हें तिजोरी या पूजा स्थल में रखते हैं, जबकि अन्य लोग मिट्टी में लगा देते हैं। इसके लिए कोई एक अनिवार्य तरीका सभी परिवारों पर लागू नहीं होता।

जौ विसर्जन का सही तरीका क्या है?

सबसे पहले मां दुर्गा को प्रणाम करें और पूजा के लिए आभार व्यक्त करें। इसके बाद जौ को सावधानी से निकालें। अंकुरित जौ को गमले या बगीचे में लगा सकते हैं अथवा अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार विसर्जित कर सकते हैं। यदि जौ के साथ मिट्टी भी है, तो उसे किसी पौधे में इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प है।