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शनि मार्गी का 3 राशियों पर असर, शनि साढ़ेसाती, शनि महादशा और अंतर्दशा में क्या करें
 

 

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। उनकी चाल में होने वाला बदलाव सभी 12 राशियों के जीवन को प्रभावित करने वाला माना जाता है। साल 2026 में शनि करीब 138 दिनों तक वक्री रहने के बाद 11 दिसंबर को मीन राशि में मार्गी होने जा रहे हैं। शनि की सीधी चाल शुरू होने के बाद कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की ज्योतिषीय संभावना है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शनि के मार्गी होने से मकर, तुला और वृषभ राशि के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है। वहीं जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, महादशा या अंतर्दशा चल रही है, उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कब मार्गी होंगे शनि देव?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि 27 जुलाई 2026 से मीन राशि में वक्री चल रहे हैं। अब 11 दिसंबर 2026 को सुबह करीब 5 बजे शनि मार्गी हो जाएंगे। उनकी सीधी चाल 9 अगस्त 2027 तक जारी रहने की गणना है।

शनि के मार्गी होने का अर्थ है कि ग्रह की apparent retrograde गति समाप्त होकर सामान्य सीधी गति दिखाई देने लगेगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इससे लंबे समय से अटके कामों में गति आने और करियर में नए अवसर मिलने की संभावना रहती है।

इन 3 राशियों को मिल सकते हैं शुभ परिणाम

1. मकर राशि

मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं। ऐसे में शनि का मार्गी होना इस राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। किसी बड़ी व्यावसायिक डील से आर्थिक लाभ होने की संभावना है। पुराने संपर्कों से फायदा मिल सकता है। लंबे समय से रुके काम भी आगे बढ़ सकते हैं।

2. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शनि की सीधी चाल सकारात्मक बदलाव ला सकती है। परिवार में सुख-शांति का माहौल बन सकता है। माता की सेहत को लेकर अच्छी खबर मिल सकती है। कला, रचनात्मकता और व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल माना जा रहा है। अनावश्यक खर्चों में कमी आने और आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना है।

3. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों को भाग्य का साथ मिल सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है। नौकरी में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकते हैं। व्यापारियों को आर्थिक लाभ के मौके मिल सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा की योजना भी बन सकती है।

शनि की साढ़ेसाती में क्या करना चाहिए?

शनि की साढ़ेसाती लगभग साढ़े सात साल की अवधि होती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, फिलहाल मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक साढ़ेसाती के अलग-अलग चरणों से गुजर रहे हैं।

इस दौरान कुछ पारंपरिक उपाय शुभ माने जाते हैं:

  • प्रत्येक शनिवार शनि देव की पूजा करें।

  • जरूरतमंद लोगों और श्रमिकों की सहायता करें।

  • बुजुर्गों का सम्मान करें और किसी के साथ अन्याय न करें।

  • शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करें।

  • हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।

शनि महादशा और अंतर्दशा में क्या करें?

वैदिक ज्योतिष में शनि की महादशा 19 वर्ष की मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति के अनुसार अलग-अलग परिणाम मिलने की मान्यता है। शनि की अंतर्दशा में भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है।

शनि महादशा या अंतर्दशा चलने पर व्यक्ति को अपने काम में ईमानदारी, अनुशासन और धैर्य बनाए रखना चाहिए। शनिवार को जरूरतमंदों को भोजन कराना, काले तिल और उड़द का दान करना तथा हनुमान जी की उपासना करना पारंपरिक उपायों में शामिल है।

हालांकि, केवल महादशा या अंतर्दशा के आधार पर किसी ग्रह को अशुभ नहीं माना जा सकता। इसके लिए जन्मकुंडली में शनि की स्थिति, भाव, दृष्टि और अन्य ग्रहों के साथ संबंध देखना जरूरी होता है।

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सबसे जरूरी बात

ज्योतिषीय मान्यताओं में शनि को न्याय और कर्म का कारक माना गया है। इसलिए जरूरतमंदों की मदद करना, मेहनत से काम करना, ईमानदारी बनाए रखना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।