☰
×

विजयादशमी 2026: दशहरे पर महासंयोग का निर्माण, जानिए शुभ कार्य करने से पहले किन नियमों का पालन करना है जरूरी

 

दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा, शस्त्र पूजन, शमी पूजन और देवी अपराजिता की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि विजयादशमी पर शुरू किए गए कार्यों को शुभ फल मिल सकता है। हालांकि, इस बार 20 अक्टूबर 2026 को रवि योग और विडाल योग के संयोग को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।ज्योतिषीय गणना के अनुसार, रवि योग को शुभ माना जाता है, जबकि विडाल योग को पारंपरिक मुहूर्त विचार में प्रतिकूल योगों में शामिल किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दोनों योग एक ही दिन हों, तो किसे प्राथमिकता देनी चाहिए? क्या विजय मुहूर्त में नया काम शुरू करना उचित होगा या किसी दूसरे समय का इंतजार करना चाहिए?

रवि योग और विडाल योग एक साथ क्यों बन रहे हैं?

ज्योतिष में रवि योग और विडाल योग की गणना अलग-अलग आधारों पर की जाती है। रवि योग सूर्य और चंद्रमा के नक्षत्रों की विशेष स्थिति से बनता है, जबकि विडाल योग वार और नक्षत्र के संयोग से बनने वाले आनंदादि योगों में गिना जाता है।इसी वजह से एक ही दिन दोनों योगों का बनना संभव है। रवि योग को शुभ मानने का अर्थ यह नहीं है कि उस दिन मौजूद प्रत्येक प्रतिकूल योग का प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाएगा।पारंपरिक मुहूर्त ज्योतिष में किसी काम के लिए समय चुनते समय तिथि, वार, नक्षत्र, करण, चंद्रमा की स्थिति और संबंधित कार्य की प्रकृति पर भी विचार किया जाता है।

क्या विडाल योग में दशहरे की पूजा नहीं करनी चाहिए?

ऐसा मानना सही नहीं होगा कि विडाल योग होने पर दशहरे की सभी धार्मिक गतिविधियां रोक देनी चाहिए। विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की पूजा, शमी पूजन, शस्त्र पूजन और अपराजिता पूजन का अपना पारंपरिक महत्व है।इन धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग में बताए गए विजयादशमी के पूजा काल को प्राथमिकता दी जा सकती है। वहीं, नया व्यापार शुरू करने, गृह प्रवेश, संपत्ति की रजिस्ट्री या विवाह जैसे बड़े कार्यों के लिए अलग मुहूर्त देखने की परंपरा है।इसलिए दशहरे की पूजा और किसी बड़े मांगलिक कार्य के शुभ समय को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

क्या रवि योग में विडाल योग का दोष खत्म हो जाता है?

यह सवाल इस बार खास चर्चा में है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रवि योग शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि उसके बनने से दूसरे सभी प्रतिकूल योग निष्प्रभावी हो जाएं।मुहूर्त निर्धारित करते समय अलग-अलग योगों का संयुक्त विचार किया जाता है। इसलिए केवल रवि योग देखकर किसी बड़े कार्य का समय तय करना उचित नहीं माना जाता।यदि आप दशहरे पर वाहन खरीदने, नया कारोबार शुरू करने या किसी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो संबंधित कार्य के लिए उपयुक्त मुहूर्त की जानकारी स्थानीय पंचांग या जानकार ज्योतिषाचार्य से ले सकते हैं।

दशहरा 2026 पर विजय मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त में क्या अंतर है?

विजयादशमी को पारंपरिक रूप से शुभ पर्व माना जाता है। इस दिन अपराह्न काल और विजय मुहूर्त का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, विजय मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त अलग-अलग समयावधियां हैं।विजय मुहूर्त का संबंध विजयादशमी सहित कुछ विशेष अवसरों पर शुभ कार्यों के लिए निर्धारित समय से है, जबकि अभिजित मुहूर्त सामान्यतः दिन के मध्य के आसपास निकाला जाता है। दोनों की गणना और समय स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।दशहरे पर पूजा-पाठ के लिए पर्व के निर्धारित पूजा काल को महत्व दिया जाता है। दूसरी ओर, गृह प्रवेश, विवाह या अन्य बड़े संस्कारों के लिए अलग मुहूर्त संबंधी नियम लागू हो सकते हैं।

दशहरे पर कौन-सा काम किस समय करना चाहिए?

  • भगवान श्रीराम की पूजा और अपराजिता पूजन: स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित विजयादशमी पूजा काल में करें।

  • शस्त्र पूजन और शमी पूजन: अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार शुभ समय का पालन करें।

  • नया व्यापार शुरू करना: रवि योग के साथ अन्य मुहूर्त संबंधी नियमों पर भी विचार करें।

  • वाहन खरीदना: वाहन खरीदने और उसकी पूजा करने के समय को अलग-अलग समझें। खरीद का निर्णय बजट और जरूरत के आधार पर भी लें।

  • संपत्ति खरीदना या गृह प्रवेश: संबंधित कार्य के लिए उपयुक्त मुहूर्त की जांच करें। केवल दशहरा होने से हर समय सभी कार्यों के लिए शुभ नहीं हो जाता।

दशहरा 2026: रवि योग, विडाल योग और विजय मुहूर्त का समय

20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार समय इस प्रकार बताया गया है:

  • रवि योग: पूरे दिन

  • विडाल योग: सुबह 6:25 बजे से शाम 6:02 बजे तक

  • नवमी तिथि समाप्त: दोपहर 12:50 बजे

  • दशमी तिथि प्रारंभ: दोपहर 12:50 बजे

  • श्रवण नक्षत्र समाप्त: शाम 6:02 बजे

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक

  • राहुकाल: दोपहर 2:56 बजे से शाम 4:21 बजे तक

ध्यान दें कि ये समय नई दिल्ली के लिए दिए गए हैं। दूसरे शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के कारण समय में अंतर हो सकता है।दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक बताए गए विजय मुहूर्त के दौरान विडाल योग भी मौजूद रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं में विजय मुहूर्त को महत्व दिया जाता है, लेकिन इसे सभी मुहूर्त संबंधी दोषों से मुक्त समय मान लेना उचित नहीं होगा।इसी तरह, शाम 6:02 बजे विडाल योग समाप्त होने के बाद का पूरा समय अपने आप शुभ नहीं हो जाता। किसी खास कार्य के लिए समय चुनते समय अन्य पंचांग संबंधी स्थितियों पर भी विचार करना चाहिए।

दशहरे पर शुभ योग से ज्यादा जरूरी है सही निर्णय

विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था, परंपरा और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। रवि योग और विडाल योग का एक साथ बनना ज्योतिषीय गणना का विषय है। ऐसे में किसी एक योग को हर स्थिति में निर्णायक मानने के बजाय काम की प्रकृति और संबंधित मुहूर्त नियमों को समझना बेहतर है।यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ज्योतिषीय योग धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं का हिस्सा हैं। किसी काम की सफलता या असफलता इन योगों से वैज्ञानिक रूप से सुनिश्चित नहीं होती।