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कल है वामन द्वादशी, वामन देव ने बलि को क्यों बनाया पाताल लोक का राजा
 

 

हिंदू धर्म में वामन द्वादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। लेकिन सवाल यह है कि जब भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग जमीन लेकर तीनों लोक नाप लिए, तो फिर उन्हें पाताल लोक का राजा क्यों बनाया गया?

राजा बलि थे भगवान विष्णु के भक्त

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि असुर कुल में जन्मे थे, लेकिन वह भगवान विष्णु के परम भक्त और महान दानी माने जाते थे। उन्होंने अपनी शक्ति और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवताओं के अधिकार समाप्त होने पर उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की।

वामन रूप में पहुंचे भगवान विष्णु

देवताओं की सहायता के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। वह एक छोटे ब्राह्मण के रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। राजा बलि ने उनका स्वागत किया और उनसे इच्छा के अनुसार दान मांगने को कहा।

भगवान वामन ने केवल तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने इसे बहुत छोटा दान समझकर तुरंत स्वीकार कर लिया।

दो पग में नाप लिए तीनों लोक

मान्यता के अनुसार, वचन मिलते ही वामन देव ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में आकाश सहित तीनों लोक नाप लिए। अब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा।

राजा बलि समझ गए कि उनके सामने स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने अपना सिर भगवान के चरणों के लिए प्रस्तुत कर दिया। वामन देव ने तीसरा पग उनके सिर पर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया।

भगवान ने बलि को क्यों बनाया पाताल लोक का राजा?

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि की दानशीलता, वचनबद्धता और भक्ति से प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही उन्हें यह वरदान भी दिया कि वह एक विशेष अवधि में पृथ्वी पर आकर अपनी प्रजा से मिल सकेंगे।

इसी कथा के कारण राजा बलि को केवल पराजित राजा के रूप में नहीं, बल्कि भगवान के प्रिय भक्त के रूप में भी याद किया जाता है। वामन द्वादशी की कथा यह संदेश देती है कि दान, वचन का पालन और भक्ति का महत्व बहुत बड़ा है।