आज है विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत, पढ़ें भगवान गणेश की पावन व्रत कथा
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अधिकमास में पड़ने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान गणेश की आराधना करते हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण या पाठ किए बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। आइए जानते हैं विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पावन कथा।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक राजा अपने राज्य में सुख-शांति और समृद्धि के साथ शासन करता था। एक समय ऐसा आया जब राज्य में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। राजा की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी और प्रजा भी विभिन्न संकटों से घिर गई।
इन परेशानियों से चिंतित होकर राजा ने ऋषि-मुनियों से समाधान पूछा। तब एक महर्षि ने उन्हें भगवान गणेश की उपासना करने और संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की सलाह दी। ऋषि ने बताया कि गणेशजी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
राजा ने पूरे श्रद्धा भाव से संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया, भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और उनकी कथा सुनी। गणपति बप्पा की कृपा से कुछ ही समय में राजा के सभी कष्ट समाप्त हो गए। राज्य में फिर से खुशहाली लौट आई और प्रजा सुखी जीवन व्यतीत करने लगी।
तभी से संकष्टी चतुर्थी के व्रत और कथा के महत्व का प्रचार-प्रसार हुआ। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत करता है और कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन के संकट दूर होते हैं तथा भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि, विवेक, धन, सुख और सफलता की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख, करियर में उन्नति और पारिवारिक खुशहाली के लिए लाभकारी माना जाता है।
पूजा के दौरान करें यह काम
- भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अर्पित करें।
- गणेश मंत्रों का जाप करें।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।