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अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करवा चौथ पर जरूर पढ़ें ये पावन कथा

 

सनातन धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को विधि-विधान से भगवान गणेश, माता गौरी, भगवान शिव, कार्तिकेय तथा करवा माता की पूजा करती हैं।

धार्मिक मान्यता है कि करवा चौथ की पूजा के दौरान दो प्रमुख कथाओं का श्रवण या पाठ किया जाता है। सबसे पहले भगवान गणेश की कथा पढ़ी जाती है, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत प्रथम पूज्य श्रीगणेश की आराधना से होती है। इसके बाद वीरावती की करवा चौथ व्रत कथा सुनाई जाती है। मान्यता है कि इन कथाओं के बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है।

पहली कथा: भगवान गणेश की कथा

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पौराणिक मान्यता के अनुसार, किसी भी व्रत, पूजा या मांगलिक कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। करवा चौथ के दिन भी सबसे पहले गणपति बप्पा का पूजन किया जाता है और उनकी कथा का श्रवण किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि भगवान गणेश की कृपा से व्रत सफल होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

दूसरी कथा: वीरावती की करवा चौथ व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, वीरावती एक साहूकार की इकलौती पुत्री थी। विवाह के बाद उसने पहली बार करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा। पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। अपनी बहन की पीड़ा देखकर उसके भाइयों ने एक पेड़ पर दीपक जलाकर छलनी के पीछे रख दिया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि चंद्रमा निकल आया है।

वीरावती ने उसे चंद्रमा समझकर अर्घ्य दिया और व्रत खोल लिया। जैसे ही उसने भोजन करना शुरू किया, उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। कुछ समय बाद उसे अपने पति की मृत्यु का समाचार मिला। दुखी वीरावती ने देवी-देवताओं की आराधना की और अपनी भूल का प्रायश्चित करते हुए पूरे श्रद्धा-भाव से पुनः करवा चौथ का व्रत किया।

उसकी सच्ची भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर माता पार्वती और भगवान गणेश की कृपा से उसके पति को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ। तभी से करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने लगा।

करवा चौथ व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत, पूजा तथा कथा का श्रवण करने से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

धार्मिक मान्यता

करवा चौथ व्रत कथा और उससे जुड़े फल हिंदू धर्मग्रंथों एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार भगवान गणेश तथा वीरावती की कथा का पाठ या श्रवण कर व्रत का पालन करते हैं।