नवरात्रि पूजा में रंग चयन का खास महत्व! जानें पहले और दूसरे दिन मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कौन-से रंग पहनें
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त व्रत, पूजा और साधना के साथ अपने पहनावे का भी विशेष ध्यान रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के हर दिन किसी खास रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। इसी बीच मशहूर एस्ट्रोलॉजर भावना उपाध्याय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर नवरात्रि के पहले और दूसरे दिन पहने जाने वाले शुभ रंगों के बारे में बताया है। आइए जानते हैं कि इन दोनों दिनों कौन से रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
पहले नवरात्रि पर कौन सा रंग पहनें?
नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है।एस्ट्रोलॉजर भावना उपाध्याय के अनुसार, पहले नवरात्रि पर सॉफ्ट और हल्के रंगों के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन आप क्रीम, बेज, सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहन सकते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हल्के रंग शांति और सकारात्मकता से जुड़े माने जाते हैं। ऐसे रंगों को पहनकर पूजा करने से मन में अच्छी ऊर्जा और सकारात्मक भाव बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
दूसरे नवरात्रि पर पहनें पीला या भगवा रंग
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है।भावना उपाध्याय के मुताबिक, दूसरे नवरात्रि पर पीले या भगवा रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पीला रंग धार्मिक परंपराओं में ज्ञान, सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वहीं, भगवा रंग ऊर्जा, उत्साह और आध्यात्मिकता से जुड़ा माना जाता है।ऐसे में दूसरे दिन पूजा के दौरान पीले या भगवा रंग के कपड़े पहनकर मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जा सकती है।
नवरात्रि में माथे पर लगाएं रोली का तिलक
एस्ट्रोलॉजर ने नवरात्रि के नौ दिनों के लिए माथे पर लाल या भगवा रोली का तिलक लगाने की सलाह भी दी है। धार्मिक मान्यताओं में तिलक को शुभता और आध्यात्मिक भाव से जोड़कर देखा जाता है।हालांकि, ये बातें धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं। इनके शुभ-अशुभ प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता।इस तरह नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ पारंपरिक रंगों और पहनावे को शामिल करके त्योहार की आस्था और उत्साह को और खास बनाया जा सकता है।