राधाकुंड में अहोई अष्टमी पर खास स्नान, यहां पढ़ें अहोई माता की आरती
अहोई अष्टमी का पर्व संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता का व्रत रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। अहोई अष्टमी पर मथुरा के गोवर्धन स्थित राधाकुंड में भी विशेष धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। यहां आधी रात को पवित्र कुंड में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासतौर पर संतान सुख की कामना करने वाले दंपती इस दिन राधाकुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधाकुंड में स्नान करने से संतान संबंधी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से महिलाएं और दंपती यहां पहुंचते हैं। इस दौरान राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
राधाकुंड में आधी रात को क्यों होता है स्नान?
ब्रजभूमि के मथुरा जिले में स्थित राधाकुंड का धार्मिक महत्व काफी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की रात यहां स्नान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपती इस दिन विशेष रूप से राधाकुंड पहुंचते हैं और पति-पत्नी एक साथ कुंड में स्नान करके राधारानी से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।
मान्यता यह भी है कि जिन दंपतियों की संतान संबंधी मनोकामना पूरी हो जाती है, वे अपने परिवार के साथ दोबारा राधाकुंड पहुंचकर राधारानी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि यह धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
अहोई अष्टमी पर क्यों की जाती है अहोई माता की पूजा?
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं सुबह स्नान करके संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं।
शाम को अहोई माता का चित्र स्थापित करके रोली, अक्षत, फूल और दीपक से पूजा की जाती है। इसके बाद स्याऊ माता की व्रत कथा सुनी जाती है और अहोई माता की आरती की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
अहोई माता की आरती
जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि विष्णु विधाता॥
ब्रह्माणी रुद्राणी कमला, तू ही है जगमाता।
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
माता रूप निराला, भक्तों को सुखदाता।
जो कोई तुमको ध्यावे, मनवांछित फल पाता॥
संतान की रक्षा करती, संकट दूर भगाती।
भक्ति भाव से जो पूजे, उसकी बिगड़ी बनाती॥
जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि विष्णु विधाता॥
अहोई अष्टमी की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
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सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
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शाम को अहोई माता का चित्र स्थापित करके विधि-विधान से पूजा करें।
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माता को रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
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पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा जरूर सुनें।
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आरती के बाद संतान की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
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अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
अहोई अष्टमी पर राधाकुंड स्नान का महत्व
अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में होने वाला मध्यरात्रि स्नान ब्रज की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। यह पर्व मातृत्व, संतान के प्रति प्रेम और राधारानी के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु राधाकुंड में स्नान के साथ पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि अहोई माता और राधारानी की सच्चे मन से आराधना करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।