सोमवती अमावस्या 2026: पीपल और तुलसी पूजन का विशेष महत्व, सुहागिन स्त्रियां करती हैं परिक्रमा
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, और जब यह तिथि सोमवार को पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए पूजा-पाठ और व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में आने वाली सोमवती अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।
इस दिन पीपल के वृक्ष और तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के पेड़ में देवताओं का वास माना जाता है, और इसकी पूजा करने से सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। सुहागिन स्त्रियां इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा करती हैं और उसकी परिक्रमा करके अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
परंपरा के अनुसार पीपल वृक्ष के चारों ओर जल अर्पित कर 108 बार या श्रद्धा अनुसार परिक्रमा करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
इसके साथ ही तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। तुलसी को हिंदू धर्म में पवित्र और देवी स्वरूप माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। श्रद्धालु इस दिन तुलसी को जल अर्पित कर दीप जलाते हैं और भक्ति भाव से पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर किया गया दान-पुण्य, व्रत और पूजा विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
हालांकि आधुनिक समय में इसे लोग आस्था और परंपरा के रूप में मनाते हैं, लेकिन यह पर्व सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से लोगों को एकजुट करने का कार्य भी करता है। सोमवती अमावस्या का यह पावन अवसर श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देता है।