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Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर करें इन चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

 

हिंदू धर्म में दान-पुण्य को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। खासकर अमावस्या तिथि पर किया गया दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार सोमवती अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं।

क्यों खास है सोमवती अमावस्या का दान?

अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है, जबकि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन होता है। ऐसे में सोमवती अमावस्या पर किए गए दान, तर्पण और पूजा-पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

अन्न का दान करें

सोमवती अमावस्या पर जरूरतमंदों को अन्न दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों और असहाय लोगों को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं और घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहती।

काला तिल दान करें

अमावस्या पर काले तिल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन काले तिल का दान करने और तिल मिश्रित जल से तर्पण करने से पितृ दोष के प्रभाव कम होने की मान्यता है।

वस्त्र दान का महत्व

जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

जल और फल का दान

गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को जल, शरबत या फलों का दान करना भी शुभ माना गया है। यह दान मानव सेवा के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है।

गौ सेवा और अन्न दान

सोमवती अमावस्या पर गाय को हरा चारा, रोटी या गुड़ खिलाना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे देवी-देवताओं और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • दान हमेशा श्रद्धा और विनम्रता के साथ करें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार ही दान दें।
  • दिखावे के लिए दान करने से बचें।
  • जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को दान देना अधिक शुभ माना जाता है।

पितरों की कृपा पाने का अवसर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर किया गया दान पितरों को संतुष्ट करता है। इससे परिवार पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है और सुख, शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।