Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष से धनिक के कैसे कष्ट टलें, पढ़ें शुक्र प्रदोष पौराणिक कथा
आज 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शुक्र प्रदोष व्रत है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अति उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के प्रभाव से भगवान शिव की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव के पूजन का विशेष महत्व है। कहते हैं कि शिव पूजन के साथ ही व्रत कथा का पाठ करने के बाद ही व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। यहां पढ़ें शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा:
सूत जी बोले: प्राचीन काल की बात है, एक नगर में तीन मित्र रहते थे, तीनों में ही घनिष्ठ मित्रता थी। उनमें एक राजकुमार पुत्र, दूसरा ब्राह्मण पुत्र और तीसरा धनिक (सेठ) पुत्र था। राजकुमार, ब्राह्मण कुमार का विवाह हो चुका था, लेकिन गौना शेष था।
एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण पुत्र ने नारियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है’। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही अपनी पत्नी को घर लाने का निश्चय किया। सेठ पुत्र अपने घर गया और अपने माता-पिता से निश्चय बताया। उन्होंने अपने बेटे से कहा कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवाना शुभ नहीं होता है। अत: शुक्रोदय के बाद तुम अपनी पत्नी को विदा करा लाना। किंतु धनिक पुत्र नहीं माना और ससुराल जा पहुंचा। ससुराल में भी उसे रोकने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन उसने अपनी जिद नहीं छोड़ी। माता-पिता को विवश होकर अपनी कन्या की विदाई करनी पड़ी।
ससुराल से विदा हो पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थी कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया अलग हो गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को काफी चोटें आईं फिर भी वे आगे बढ़ते रहे। कुछ दूर जाकर उनकी भेंट डाकुओं से हो गई। डाकू उनका धन-धान्य लूट ले गए। दोनों रोते-पीटते घर पहुंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलवाया। वैद्य ने देखने के बाद घोषणा कि धनिक पुत्र तीन दिन में मर जाएगा।
जब ब्राह्मण पुत्र को यह समाचार मिला तो वह तुरंत मिला। उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा- इसे पत्नी सहित ससुराल वापस भेज दें। यह सारी बाधाएं इसलिए आई हैं क्योंकि उनका पुत्र शुक्रास्त में पत्नी को विदा करा लाया है। यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा। धनिक को ब्राह्मण कुमार की बात जंच गई और अपनी पुत्रवधू और पुत्र को वापिस लौटा दिया। ससुराल पहुंचते ही धनिक पुत्र की तबीयत ठीक होती चली गई। शुक्र प्रदोष के महात्म्य से सभी घोर कष्ट टल गए। इसके बाद उन्होंने शेष जीवन सुख और आनंदपूर्वक व्यतीत किया। अंत में वह पति-पत्नी दोनों स्वर्ग लोक को गए।
शुक्र प्रदोष व्रत के लाभ:
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जो जातक शुक्र प्रदोष व्रत करता है उसे सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सफलता मिलती है।