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Shukra Pradosh Vrat 2026: इस दिन रखा जाएगा प्रदोष व्रत! दूर करें तारीख का भ्रम, नोट करें पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

 

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने और विधि-विधान से शिवजी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है।अक्टूबर 2026 में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को लेकर लोगों के मन में असमंजस है। त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को दोपहर से शुरू होकर 24 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी। ऐसे में सवाल है कि प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा? पंचांग और प्रदोष काल की गणना के अनुसार, इस बार व्रत शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की तारीख और तिथि

पंचांग में दी गई जानकारी के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समय इस प्रकार है:

  • त्रयोदशी तिथि शुरू: 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, दोपहर 2:36 बजे

  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 24 अक्टूबर 2026, शनिवार, दोपहर 1:37 बजे

  • प्रदोष व्रत की तारीख: 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार

धार्मिक परंपरा के अनुसार, प्रदोष व्रत के लिए सूर्यास्त के आसपास का प्रदोष काल महत्वपूर्ण होता है। 23 अक्टूबर को त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में पड़ने के कारण इसी दिन व्रत रखना उचित माना गया है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, 23 अक्टूबर को पूजा का समय इस प्रकार है:

ध्यान दें कि पूजा के सटीक समय में शहर और स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार अंतर हो सकता है। अपने क्षेत्र के पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लें।

शुक्र प्रदोष व्रत पर चौघड़िया मुहूर्त

उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस दिन बताए गए चौघड़िया मुहूर्त निम्न हैं:

  • लाभ चौघड़िया: रात 8:54 बजे से 10:29 बजे तक

  • शुभ चौघड़िया: रात 12:07 बजे से 1:42 बजे तक

प्रदोष व्रत की मुख्य शिव पूजा के लिए प्रदोष काल को प्राथमिकता दी जाती है। चौघड़िया का उपयोग अन्य शुभ कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जा सकता है।

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना पूरी हो सकती है।

शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा की जाती है। हालांकि, व्रत के फल से जुड़ी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की पूजा विधि

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के लिए इन चरणों का पालन किया जा सकता है।

  1. सुबह स्नान और संकल्प: सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थल तैयार करें: घर के मंदिर की सफाई करें। चौकी पर साफ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

  3. गंगाजल और पुष्प अर्पित करें: पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और भगवान शिव तथा माता पार्वती को फूल अर्पित करें।

  4. दीपक और धूप जलाएं: घी का दीपक जलाकर धूप-दीप से भगवान की पूजा करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं।

  5. प्रदोष काल में शिव अभिषेक करें: शाम को प्रदोष काल के दौरान शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक करें। परंपरा के अनुसार, दही, शहद, घी और शक्कर का भी उपयोग किया जाता है। पूजा में स्वच्छता और स्थानीय मंदिर की परंपराओं का ध्यान रखें।

  6. बेलपत्र अर्पित करें: भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। माता पार्वती को पुष्प और श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सकते हैं।

  7. मंत्र जाप और व्रत कथा: भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।

  8. आरती करें: पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत में किन बातों का ध्यान रखें?

  • व्रत अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।

  • पूजा के दौरान साफ-सफाई और श्रद्धा का ध्यान रखें।

  • शाम की पूजा स्थानीय पंचांग में दिए गए प्रदोष काल के अनुसार करें।

  • व्रत के नियम परिवार की परंपरा और अपनी सुविधा के अनुसार अपनाएं।