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श्री गणेश अष्टकम्: भगवान गणेश की आराधना का पवित्र स्तोत्र, पाठ करने से दूर होते हैं विघ्न

 

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति जी की पूजा करने की परंपरा है। श्री गणेशाष्टकम् भगवान गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। श्रद्धालु इसका पाठ बुधवार, गणेश चतुर्थी या किसी भी शुभ दिन भगवान गणेश की आराधना के दौरान कर सकते हैं।

श्री गणेशाष्टकम्

गणेशाष्टकम्

एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्।
विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥

गजाननं भूतगणादिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारणं
नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥

अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम्।

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अनेकदन्तं भक्तानामेकदन्तमुपास्महे॥

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्बः स्कन्दपूर्वजोऽव्ययः॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥

जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥

गणेशाष्टकम् पाठ का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेशाष्टकम् का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। विद्यार्थी ज्ञान और एकाग्रता के लिए, जबकि कारोबारी नए कार्य की शुरुआत से पहले गणपति का स्मरण कर सकते हैं।बुधवार के दिन सुबह स्नान करके भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करने के बाद गणेशाष्टकम् का पाठ करना शुभ माना जाता है।